
VIDEO: 12 महीने की बछिया... 4 किलो दूध वो भी बिना बच्चा दिए, लोग हैरान
AajTak
गोरखपुर में 12 महीने की बछिया बच्चे को जन्म दिए बिना दूध दे रही है. इस घटना से लोग हैरान हैं. सबसे हैरानी वाली बात तो ये है कि बछिया एक या दो किलो नहीं बल्कि दिन में चार लीटर दूध दे रही है. लोग इसे चमत्कार मानकर बछिया को देखने पहुंच रहे हैं. लोगों का कहना है कि घटना आश्चर्यचकित कर देने वाली है.
यूपी के गोरखपुर में एक गाय की 12 महीने की बछिया चर्चा का विषय बनी हुई है. बिना बच्चे को जन्म दिए वो दूध दे रही है. इस घटना से लोग हैरान हैं. बड़ी संख्या में लोग इस बछियो को देखने पहुंच रहे हैं.
एक या दो नहीं, चार किलो दूध
मामला जिले के विकासखंड खोराबार की ग्रामसभा चढ़ावा का है. यहां बच्चे को जन्म दिए बिना 12 महीने की बछिया के दूध देने से लोगों में कौतूहल है. हैरानी वाली बात ये है कि बछिया एक या दो किलो नहीं बल्कि दिन में चार लीटर दूध दे रही है.
बिना बच्चा दिए ही दूध दे रही बछिया
इसको लेकर ग्रामीणों का कहना है कि बछिया मात्र 12 महीने की है. दिलचस्प बात यह है कि वह बिना बच्चा दिए ही दूध दे रही है. एक पाव से शुरू हुआ दूध का सिलसिला अब लगभग चार लीटर तक पहुंच गया है. वो दिन में दो बार चार-चार लीटर दूध दे रही है.
भारी संख्या में बछिया देखने पहुंच रहे लोग

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.









