
US-Israel Iran War: यूएस-इजरायल के ईरान पर हमले... खामेनेई की मौत, तेल की कीमतों में दिख सकता है बंपर उछाल!
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US-Israel के ईरान पर किए गए हमलों में Iran के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि हो चुकी है. इस युद्ध से सबसे बड़ी टेंशन तेल की कीमतों को लेकर बढ़ी है और इसका असर अगले हफ्ते की शुरुआत के साथ ही देखने को मिल सकता है.
अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों (US-Israel Strikes On Iran ) में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत (Ayatollah Khamenei Killed) हो चुकी है और ईरानी मीडिया ने इसकी पुष्टि भी कर दी है. इस युद्ध ने दुनिया की टेंशन को एक बार फिर बढ़ा दिया है और खासतौर पर तेल की कीमतों को लेकर चिंता चरम पर पहुंच गई है. रिपोर्ट्स की मानें, तो अगले सप्ताह क्रूड ऑयल की कीमतों (Crude Oil Price) में तगड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. इस युद्ध के चलते हॉर्मुज ऑफ स्ट्रेट पर जहाजों को रोक दिया गया है, जिससे मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई बाधित होती नजर आ रही है.
हॉर्मुज में रुकावट ने बढ़ाई चिंता अमेरिका और इजरायल के ईरान पर अटैक (US-Israel Attack On Iran) के बाद ईरान की ओर से किए गए जवाबी हमलों के बीच ये खबर आई कि हॉर्मुज ऑफ स्ट्रेट (Hormuz Of Strait) पर तेज के जहाजों को रोका गया है, ये दुनिया की टेंशन बढ़ाने वाला इसलिए है, क्योंकि वैश्विक खपत का करीब 20% तेल इसी रूट से होकर गुजरता है और इसमें किसी भी तरह की रुकावट कीमतों में तगड़ा उछाल लाने वाली साबित हो सकती है. इससे कीमतों में और ज्यादा उछाल और लंबे समय तक असर देखने को मिल सकता है.
युद्ध से पहले ही बढ़ने लगे थे दाम ईरान के साथ US-Israel के युद्ध की आशंकाओं से तेल की कीमतें पहले ही बढ़ी हुई नजर आई थीं. इंटरनेशनल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को 72.87 डॉलर प्रति बैरल के सात महीने के सबसे हाई लेवल पर बंद हुआ था. तेल सेक्टर में ईरान का दबदबा है और देश से हर दिन लगभग 1.6 मिलियन बैरल तेल एक्सपोर्ट होता है, जिसमें से ज्यादातर Crude Oil चीन को जाता है. अगर सप्लाई रुकती है, तो चीनी, ग्लोबल मार्केट में तेल के लिए कहीं और रुख करेगा, जिससे कीमतों में तगड़ा इजाफा दिख सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बढ़ा सकता है चिंता होर्मुज स्ट्रेट, जिससे हर दिन ग्लोबल तेल सप्लाई का करीब 20 फीसदी तेल गुजरता है. बता दें कि होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे संवेदनशील चोकपॉइंट है और इस संकरे कॉरिडोर से कच्चे तेल का प्रवाह मुख्य रूप से खाड़ी उत्पादक देशों सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर से आता है और यह तेल चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख एशियाई बाजारों में पहुंचता है. हालांकि, भले ही युद्ध के चलते इसमें रुकावट देखे को मिल रही है, लेकिन एनालिस्ट का कहना है कि ईरान के पास स्ट्रेट को बंद करने की कोशिश करने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि इससे उसका अपना एक्सपोर्ट बंद हो जाएगा और उसके इकलौते बड़े कस्टमर चीन को नुकसान होगा.
90 डॉलर के पार पहुंचेगा क्रूड! सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के क्लेटन सीगल के युद्ध से पहले के हालात के अनुसार, अगर ईरान टैंकर ट्रैफिक में रुकावट डालता है, तो क्रूड ऑयल 90 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो सकता है. वहीं अब युद्ध चरम पर पहुंचने और इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत की खबर ने टेंशन बढ़ा दी है. रिपोर्ट की मानें, तो अमेरिकी गैस की कीमतें 3 डॉलर प्रति गैलन से काफी ऊपर जा सकती हैं, US मोटरिंग क्लब AAA के अनुसार, पिछले हफ्ते अमेरिकी गैस की कीमतें औसतन 2.98 प्रति गैलन दर्ज की गई थीं.

आज सबसे पहले हम आपको वो तस्वीर दिखाएंगे. जो मुंद्रा पोर्ट से आई है. यहां स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में गरजती मिसाइल और बरसते ड्रोन्स के बीच से चलकर LPG गैस से भरा शिवालिक जहाज भारत आ गया है. इसमें इतनी गैस है जिससे 32 लाख 40 हजार LPG गैस सिलिंडर भरे जा सकते हैं. लगभग इतनी ही गैस लेकर एक और जहाज. नंदा देवी कल सुबह भारत पहुंच जाएगा. इसके बाद आपको इजरायल-अमेरिका और ईरान के युद्ध के 17वें दिन का हर अपडेट बताएंगे. जंग में पहली बार ईरान ने सेजिल मिसाइल दागी. ये मिसाइल बेहद खतरनाक है, इसके जरिए ईरान अपने देश के किसी भी हिस्से से पूरे इजरायल को निशाना बना सकता है. इस सबके बीच UAE में तेल डिपो में आग लगने के साथ ही दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी हमला हुआ.

दिल्ली एम्स ने 31 वर्षीय हरीश राणा के लिए पैसिव यूथेनेशिया प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस के लिए हरीश को शनिवार को गाजियाबाद स्थित आवास से एम्स के डॉ. बीआर अंबेडकर संस्थान रोटरी कैंसर अस्पताल की पैलिएटिव केयर यूनिट में शिफ्ट किया गया है, जहां धीरे-धीरे हरीश के लाफ सपोर्ट सिस्टम को वापस लिया जाएगा, ताकि शरीर स्वाभाविक रूप से शांत हो जाए.

महायुद्ध सत्रह दिन से जारी है. मैं श्वेता सिंह इस वक्त इजरायल की राजधानी तेल अवीव में हूं. जहां आज भी ईरान की तरफ से मिसाइल से हमला किया जाता रहा. पश्चिम एशिया में युद्ध कब तक चलेगा इस सवाल पर इजरायल ने बड़ी बात कही है. दावा किया कि उसने कम से कम 3 हफ्ते तक युद्ध जारी रखने की योजना बनाई है. अमेरिका और इज़राइल के बीच ईरान पर युद्ध तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गया है, जिससे तेल की कीमतों पर असर पड़ रहा है. पिछले 15 दिनों में ईरान पर भारी बमबारी हुई है. लेकिन उसने हथियार नहीं डाले हैं, इसके बाद इजरायल कह रहा है कि उसकी योजना अगले 3 हफ्तों तक युद्द जारी रखने की है.

चंद्रपुर में एक बाघ के सड़क पार करने के दौरान लोगों की लापरवाही सामने आई. राहगीरों ने अपनी गाड़ियां रोककर बाघ को घेर लिया और उसके बेहद करीब जाकर सेल्फी और वीडियो बनाने लगे. यह घटना दुर्गापुर-मोहुर्ली रोड की है, जो ताडोबा टाइगर रिजर्व के पास है. वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग कार्रवाई की तैयारी कर रहा है.

युद्ध के मोर्चे पर ये समझ में नहीं आ रहा है कि इस युद्ध में जीत कौन रहा है. जिस ईरान को समझा जा रहा है कि सुप्रीम लीडर के मारे जाने के बाद वो सरेंडर कर देगा. वो कहीं से भी पीछे हटता नहीं दिख रहा है. बल्कि ईरान तो और ज्यादा अग्रेसिव हो गया है. और इजरायल के अलावा उसने यूएई का बुरा हाल किया हुआ है. दुबई को तो ईरान ने धुआं धुआं कर दिया. दुबई का हाल ये है कि उसकी ग्लोबल कैपिटल वाली इमेज को ईरान के हालिया हमलों से बहुत बड़ा डेंट लगा है.

पश्चिम एशिया में जंग से तेल और गैस की किल्लत की आशंका के बीच भारत के लिए अच्छी खबर है. भारतीय जहाज शिवालिक कतर से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस लेकर भारत आ गया है, एलपीजी से लदा भारतीय जहाज शिवालिक गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंचा है. ये जहाज लगभग 46 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर आया है, एक घरेलू सिलेंडर में लगभग 14.2 किलोग्राम LPG भरी जाती है. इस तरह से 46 हजार मीट्रिक टन में 32.4 लाख घरेलू सिलेंडर भरे जा सकते हैं. बता दें कि 14 मार्च को ईरान ने शिवालिक को हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की इजाजत दी थी. वहीं, जहाज नंदा देवी और जग लाडकी कल तक भारत पहुंच सकता है. नंदा देवी जहाज पर भी 46,000 टन LPG लदा है.

युद्ध के बीच भारत का शिवालिक जहाज मुंद्रा पोर्ट पहुंचा है. 45 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर शिवालिक पहुंचा है. कल नंदा देवी जहाज भी LPG की सप्लाई लेकर पहुंच रहा है. ईरान से अमेरिका-इजरायल के युद्ध का तीसरा हफ्ता शुरू हो चुका है. ईरान के खिलाफ इस युद्ध में प्रलय की स्थिति तो है लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप कहीं से भी निर्णायक भूमिका में नजर नहीं आ रहे. होर्मुज का समंदर न सिर्फ ट्रंप के लिए सैन्य चुनौती बन गया है, बल्कि कूटनीतिक झटके भी उन्हें मिलते दिख रहे हैं.






