
UP: मेरठ की डेढ़ हजार दुकानों के अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के दस साल पहले 2014 में दिए उस आदेश को बहाल रखा है, जिसमें भूखंड 661/6 के अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण आदेश दिया गया है. इसके साथ ही आवासीय क्षेत्र में हुए व्यावसायिक निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश दिए गए हैं.
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मेरठ की सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. आवासीय क्षेत्र के भू उपयोग नियमों में बदलाव करके किए गए निर्माण को अवैध करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसे ढहाने का फैसला सुना दिया है. यानी अदालत ने डेढ़ हजार दुकानों और व्यावसायिक स्थलों को अवैध घोषित कर बुलडोजर चलाने का रास्ता साफ कर दिया है.
इस फैसले से मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट के व्यापारियों को सुप्रीम कोर्ट से जोरदार झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने अपने फैसले के जरिए शास्त्री नगर विकास योजना के तहत आवासीय क्षेत्र में भू-उपयोग परिवर्तन कर किए गए सभी निर्माण को अवैध बताया है. उन्हें ध्वस्त करने का आदेश भी दिया है.
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
कोर्ट ने ऐसे अवैध रूप से बनाए गए भवनों के मालिकों को परिसर खाली करने के लिए तीन महीने का वक्त दिया है. इसके 2 हफ्ते बाद आवास एवं विकास परिषद को अवैध निर्माणों को ध्वस्त करना होगा. इस कार्य में सभी प्राधिकारी सहयोग करेंगे. अगर इसमें कोई अधिकारी लापरवाही करता है, तो उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना के तहत कार्यवाही की जाएगी.
कोर्ट ने इसके साथ ही आवास एवं विकास के उन सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं, जिनके कार्यकाल में ये सब कुछ घपला घोटाला होता रहा.
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