
Trump Rise China Tension: चीन के रास्ते बंद करते जा रहे ट्रंप, पहले वेनेजुएला...अब ईरान के तेल पर संकट
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Donald Trump ने बीते कुछ दिनों कई बड़े फैसले लिए हैं, जिनसे ग्लोबल टेंशन बढ़ी है. बात ईरान पर किए गए अटैक की हो या फिर वेनेजुएला में स्ट्राइक की, दोनों तेल संपन्न देशों पर एक्शन से अमेरिका ने चीन के रास्ते बंद करने का काम किया है.
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले (US-Israel Attack On Iran) किए और इसमें ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनेई की मौत (Ayatollah Khamenei Killed) हो गई. बीते कुछ समय में ये अमेरिका की ओर से किया गया दूसरा बड़ा अटैक है, क्योंकि इससे पहले यूएस ने वेनेजुएला पर एयरस्ट्राइक (US Venezuela Strike) करते हुए वहां के राष्ट्रपति मादुरो को अरेस्ट किया था. खास बात ये है कि अमेरिका के दोनों ही हमले सीधे चीन को चोट पहुंचाने वाले नजर आए हैं या कहें डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक चीन के सारे रास्ते बंद करते जा रहे हैं और इसका जरिया बन रहा है कच्चा तेल (Crude Oil).
ईरान-वेनेजुएला और ट्रंप का ऑयल गेम अमेरिका ने बीते दिनों वेनेजुएला पर अटैक (US Strikes Venezuela) किया था. एयरस्ट्राइक के बाद राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro) की गिराफ्तारी और फिर वेनेजुएला के तेल के खजाने पर ट्रंप का कब्जा हो गया. वहीं अब तेल संपन्न ईरान अमेरिका के निशाने पर आया और बड़ा हमला देखने को मिला. कहीं न कहीं इन दोनों तेल के खजाने पर बैठे देशों पर अमेरिकी एक्शन, चीन पर सीधा निशाना माना जा सकता है, क्योंकि इनका सबसे बड़ा तेल खरीदार China ही रहा है.
सबसे पहले बात करते हैं ईरान की, तो इसके पास दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा सिद्ध तेल रिजर्व है, जो 209 अरब बैरल के आसपास है, जो दुनिया के कुल तेल भंडार का लगभग 12 फीसदी होता है. वहीं पूरे मिडिल ईस्ट के कुल Oil Reserve का करीब एक चौथाई है. तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद भी Iran रोजाना करीब 3.3 से 3.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है और दुनिया के तमाम ऊर्जा बाजारों में एक अहम रोल निभा रहा है. फिलहाल ये रोजाना 1.5 मिलियन बैरल तेल का निर्यात जारी रखे हुए है.
ईरान पर अटैक, चीन के लिए क्यों टेंशन? Iran पर अमेरिका का अटैक चीन के लिए बड़ी चिंता का सबब इसलिए भी है, क्योंकि ड्रैगन अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है. रिपोर्ट्स की मानें, तो चीन द्वारा ईरान के कुल क्रूड ऑयल निर्यात का करीब 80 फीसदी के आसपास आयात किया जाता है, जो लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा है. China ईरानी तेल को प्रतिबंधों के बीच अलग-अलग चैनलों के जरिए खरीदता है, जिनमें छोटे रिफाइनर, थर्ड-पार्टी ट्रेडर्स शामिल हैं.
अमेरिकी प्रतिबंध ही हैं, जिसकी वजह से चीन को सस्ता यानी डिस्काउंट पर Iranian Crude Oil मिलता है. ऐसे में इसकी सप्लाई रुकने से चीन को भारी संकट का सामना करना पड़ सकता है. युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद होने से उसकी टेंशन और भी बढ़ गई है, क्योंकि दुनिया के तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी Oil Rout से होकर गुजरता है.

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