
Sri Lanka के हालात बेहद खराब, महंगाई ने तोड़ी आम जनता की कमर, देखें लंच ब्रेक
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श्रीलंका के हालात कितने ख़राब है उसकी तस्वीरें इस वक़्त पूरी दुनिया में वायरल हो रही है. पिछले तीन महीनों से लोग सड़कों पर हैं. गुस्सा इस कदर आसमान छू रहा है कि गुस्साई जनता ने राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री आवास पर ही कब्जा कर लिया. इसी बीच श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. ऐसा लगता है कि वाकई श्रीलंका की लंका लग चुकी है और अब ये लंका बस राम भरोसे ही रह गया है. भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका करीब करीब दीवालिया हो चुका है. श्रीलंका में इन दिनों हालात बेहद खराब हैं. यहां अस्पतालों में दवाईयां खत्म हो गई हैं. पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत के बाद पंप पर सैना तैनात कर दी गई है. यहां खाने पीने की चीजों की क़ीमत आसमान छू रही हैं. देखें लंच ब्रेक

आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









