
Shani Nakshatra Parivartan 2025: दशहरे के 1 दिन बाद होगा शनि का नक्षत्र परिवर्तन, इन राशियों को होगा फायदा
AajTak
Shani Nakshatra Parivartan 2025: शनि का नक्षत्र गोचर किसी बड़े परिवर्तन से कम नहीं माना जाता है. 3 अक्टूबर 2025 को शनि पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे. न्यायप्रिय शनि के इस परिवर्तन का प्रभाव कई राशियों पर सकारात्मक रूप से देखा जा सकेगा.
Shani Nakshatra Parivartan 2025: इस बार दशहरा 2 अक्टूबर को मनाया जाएगा. दशहरे को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. पंचांग के मुताबिक, ठीक इसके अगले दिन शनि का नक्षत्र परिवर्तन करेंगे. यानी 3 अक्टूबर को शनि पूर्वभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इस नक्षत्र में शनि का प्रवेश पूरे 27 साल बाद होगा, जो कि किसी संयोग से कम नहीं माना जा रहा है.
ज्योतिष शास्त्र में शनि का नक्षत्र परिवर्तन बहुत ही महत्वपूर्ण और खास माना जाता है. शनि के नक्षत्र परिवर्तन देश-दुनिया के साथ साथ मानव जीवन को भी पूरा बदलकर रख देता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शनि को एक क्रूर ग्रह माना जाता है, परंतु यदि शनि कुंडली में मजबूत होता है तो जातकों को इसके अच्छे परिणाम मिलते हैं जबकि कमजोर होने पर यह अशुभ फल देता है. हिंदू धर्म में शनि को आयु, दुख, पीड़ा, विज्ञान, तकनीकी, लोहा, कर्मचारी आदि का कारक माना जाता है. तो चलिए जानते हैं कि 3 अक्टूबर होने जा रहे शनि के नक्षत्र परिवर्तन से किन राशियों को फायदा होगा.
1. मिथुन
शनि का यह बदलाव मिथुन राशि वालों के लिए जीवन में स्थिरता लेकर आएगा. लंबे समय से अटके हुए काम पूरे होंगे. नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है. व्यापारियों को भी निवेश से फायदा होगा. पारिवारिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी और जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा. इस समय आप नई गाड़ी या प्रॉपर्टी लेने का भी विचार कर सकते हैं.
2. मकर
मकर राशि वालों के लिए शनि का नक्षत्र परिवर्तन किसी आशीर्वाद से कम नहीं माना जा रहा है. अचानक धन लाभ के योग बनेंगे. करियर में नए अवसर मिलेंगे. विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता मिलेगी. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी समय अनुकूल रहेगा. प्रेम संबंधों में मजबूती आएगी. विवाह के योग भी बन सकते हैं.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












