
Shaktipeeth Highway Project: शक्तिपीठ हाईवे के विरोध में क्यों हैं महाराष्ट्र के किसान? सरकार को दी कड़ी चेतावनी
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किसानों के अनुसार, उन्हें जो पारिश्रमिक देने का वादा किया है, वह भी पर्याप्त नहीं है. यहां तक कि वे अधिक कीमत पर भी अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं.
महाराष्ट्र में शक्तिपीठ राजमार्ग परियोजना पर बवाल मचा हुआ है. यह राजमार्ग महाराष्ट्र के 12 जिलों से होकर गुजरेगा और कोल्हापुर के अंबाबाई से लेकर नांदेड़ के रेणुका देवी जैसे प्रमुख पूजा स्थलों को जोड़ेगा. शक्तिपीठ राजमार्ग की लंबाई 802 किलोमीटर है. लेकिन किसान इसका विरोध कर रहे हैं.
दरअसल, किसान और एमवीए (महा विकास अघाड़ी) इस परियोजना के खिलाफ हैं क्योंकि इससे किसानों की जमीन चली जाएगी. शक्तिपीठ हाईवे के लिए 12 जिलों में करीब 8400 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जरूरत है. इसमें से 8100 हेक्टेयर जमीन किसानों से ली जाएगी. इस परियोजना की लागत 86 हजार करोड़ है. शक्तिपीठ राजमार्ग वर्धा, यवतमाल, हिंगोली, नांदेड़, धाराशिव, परभणी, बीड, सोलापुर, सांगली, कोल्हापुर और सिंधुदुर्ग से होकर गुजरेगा.
क्यों विरोध में हैं किसान?
फरवरी में सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की थी लेकिन किसान इसके खिलाफ हैं. सरकार ने उन किसानों को नोटिस भेजा है, जिनकी जमीन जाने वाली है. कोल्हापुर और पश्चिमी महाराष्ट्र के किसानों के पास छोटी-छोटी जमीन है और उनके पास गुजारा करने के लिए पैसे कमाने के दूसरे साधन भी नहीं हैं. सरकार की अधिग्रहण प्रक्रिया के बाद उनके भूमिहीन होने की आशंका है. किसान पहले भी इसका विरोध कर चुके हैं. विरोध के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस परियोजना को रद्द करने का वादा किया था लेकिन मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद उन्होंने घोषणा की कि महायुति किसी भी तरह महत्वाकांक्षी “शक्तिपीठ” राजमार्ग परियोजना को पूरा करेगी.
किसानों के अनुसार, उन्हें जो पारिश्रमिक देने का वादा किया है, वह भी पर्याप्त नहीं है. यहां तक कि वे अधिक कीमत पर भी अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके पास खेती करने और परिवार चलाने के लिए जमीन नहीं बचेगी. किसान नेता राजू शेट्टी और कोलापुर से कांग्रेस नेता सतेज पाटिल ने आरोप लगाया कि यह परियोजना ठेकेदारों और महायुति सरकार के कुछ नेताओं के लाभ के लिए बनाई जा रही है. यहां तक कि कुछ नौकरशाह भी इसमें शामिल हैं, ताकि वे परियोजना की घोषणा से पहले ही जमीन का लाभ उठा सकें.
किसानों ने दे डाली चेतावनी

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