
Sahitya Aaj Tak 2024: 'कब्जेदार से छुड़वाकर प्रॉपर्टी सही हकदार को देना न्याय', राम मंदिर पर ओवैसी के सवालों का बालकनाथ ने दिया जवाब
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साहित्य आजतक के मंच पर पहले दिन बाबा बालकनाथ भी पहुंचे. उन्होंने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से लेकर रामराज्य तक पर बात की. उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी को भी उनके सवालों और दावों पर जवाब दिया और कहा उन्हें ज्यादा नहीं बोलना चाहिए. पढ़ें बाबा बालकनाथ की आजतक से बातचीत की अहम बातें.
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दो दिनों के लिए साहित्य आजतक का मंच सजा हुआ है. इस कार्यक्रम में शिरकत करने राजस्थान के तिजारा से बीजेपी विधायक बाबा बालकनाथ भी पहुंचे. उन्होंने अपनी चुनावी जीत पर चर्चा की और राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा को लेकर चल रहे कुछ अहम सवालों के जवाब भी दिए. असदुद्दीन ओवैसी के सवालों और दावों पर भी उन्होंने टिप्पणी की. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि किसी प्रॉपर्टी पर अवैध कब्जे को हटाकर उसे सही हकदार को देना ही न्याय कहलाता है.
साहित्य आजतक में बाबा बालकनाथ ने एक महंत के रूप में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा पर बात की. उन्होंने बताया कि वह भावुक हैं इस पल के लिए कि रामलला वहां विराजमान होने वाले हैं. हमार पूर्वजों ने लंबा सघर्ष किया और आज वो दुनिया में नहीं है लेकिन आज हमें यह पल देखने को मिल रहा है.
बाबा बालकनाथ पर आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति करने के आरोप लगते हैं. उन्होंने चुनाव के दौरान तिजारा विधानसभा की चुनावी लड़ाई को भारत-पाकिस्तान का मैच बताया था. उन्होंने कहा कि उनका भाव सेवा का है. संत का धर्म ही सभी के सेवा भाव का होता है. राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के संबंध में एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि जो राम को नहीं मानते हैं वो ही सवाल उठा रहे हैं.
गर्भगृह बन चुका है, तो हो सकती प्राण प्रतिष्ठा- बालकनाथ
बाबा बालकनाथ ने बताया कि बीजेपी का गठन ही राम मंदिर बनाने को लेकर हुआ है. जो लोग ये बातें करते हैं कि बीजेपी चुनाव को देखकर कर रही है वो तो खुद भी कर सकते थे. उनके पास भी अवसर था. अगर वे भी इस देश की परंपराओं को मानते तो वे भी कर सकते थे और श्रेय ले सकते थे. शंकराचार्यों के अर्ध निर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के सवाल पर उन्होंने बताया कि अगर गर्भगृह का निर्माण हो चुका है तो उसमें प्राण प्रतिष्ठा की जा सकती है.
असदुद्दीन ओवैसी के दावों पर क्या बोले बाबा बालकनाथ?

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