
Russia-Ukraine War@4 Month: रूस-यूक्रेन युद्ध का सबसे खतरनाक दौर अब आने वाला है!
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Russia-Ukraine War शुरू हुए आज चार महीने पूरे हो गए. युद्ध आज भी उसी रफ्तार से जारी है जिस रफ्तार से शुरू हुआ था. यूक्रेन के शहर के शहर तबाह हुए पड़े हैं लेकिन युद्ध का न तो कोई नतीजा निकलता दिख रहा है और न ही शांति की बात आगे बढ़ रही है. तो किस दिशा में जा रही जंग? क्या तीसरे World War के हालात बन रहे हैं. पढ़िए खास विश्लेषण.
'युद्ध में जीत का मूलमंत्र है रफ्तार... शत्रु युद्ध के लिए तैयार न हो तो इस अवस्था का लाभ उठाएं. उस रास्ते से आगे बढ़ें दुश्मन को जिसकी भनक तक न हो. उन स्थानों पर सबसे पहले धावा बोलें जहां दुश्मन सुरक्षा की दृष्टि से सबसे कमजोर हो...' युद्ध पर ढाई हजार साल पहले लिखी गई ऐतिहासिक किताब Art of War में चीनी दार्शनिक सं जू उन उपायों का जिक्र करते हैं जो विजेता सेनापति अपनाते हैं. आज भी दुनिया एक जंग बल्कि कहें तो एक महाजंग की गवाह बनी हुई है. रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुए आज चार महीने पूरे हो गए. न जंग थम रही है न तबाही का आलम.
24 फरवरी 2022 को सुबह-सुबह जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन पर हमले का औपचारिक ऐलान किया था तब तक रूसी वायुसेना यूक्रेन के सौ से अधिक मिलिटरी अड्डों पर कुछ ही मिनट पहले बमबारी कर चुकी थी, सीमा के प्रहरियों और बाड़बंदी की ताकत को मसल रूसी सेना की टुकड़ियां यूक्रेन के शहरों में घुस चुकी थीं, राजधानी कीव पर बमवर्षक विमान बमबारी शुरू कर चुके थे. पुतिन ने जंग का ऐलान किया और कहा कि यूक्रेन की सेना हथियार डाले और घर जाए तभी बच पाएंगे सैनिक.
जंग के इस ऐलान के बाद एक पल को दुनिया को लगा कि युद्ध बस कुछ घंटों की बात है और यूक्रेन सरेंडर करने ही जा रहा है. वर्ल्ड पावर रूस के खिलाफ आखिर कितनी देर टिक पाएगा यूक्रेन? अमेरिकी खुफिया एजेंसी तक का अनुमान था कि जेलेंस्की की सेना कुछ दिनों में सरेंडर कर देगी और राजधानी कीव बस कुछ दिन के अंदर रूसी सेना के कब्जे में होगा. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. दुनिया को चौंकाते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने मैदान नहीं छोड़ा, बल्कि जनता को साथ लेकर सैनिकों के साथ युद्ध के मोर्चे पर डट गए. तब का दिन है और आज चार महीने बाद का यूक्रेन. शहर के शहर तबाह हो गए, 80 लाख लोग देश छोड़कर भाग गए, लेकिन यूक्रेन ने सरेंडर नहीं किया और आज 100 से अधिक मोर्चों पर यूक्रेन की सेना और हथियार उठाए आम लोग और दुनिया भर से आए वॉलंटियर लड़ाके रूसी सेना का मुकाबला जमकर कर रहे हैं.
कहां हुई गलती? किसी दार्शनिक ने ठीक ही कहा है कि युद्ध तड़प, दर्द और तबाही के सिवा कुछ भी नहीं. अपनी किताब Art of War में सं जू लिखते हैं- 'यदि आप दुश्मन के बारे में सही जानकारी के अभाव में उचित समय पर हमला नहीं कर पाते हैं तो वह युद्ध वर्षों तक खिंच सकता है. युद्ध जितना लंबा खिंचता है आर्थिक और सैन्य क्षति उतनी ज्यादा बढ़ती जाती है.' रूसी सेना ने शुरुआती दिनों में यूक्रेन में यही गलती की. कई शहरों पर और कई तरफ से सैनिक आगे बढ़े लेकिन जवाबी कार्रवाई में यूक्रेन की सेना ने रूसी सैन्य काफिलों, फाइटर जेट्स और यहां तक कि ब्लैक सी में तैनात युद्धपोत को भी नुकसान पहुंचाया.
किस पक्ष को अब तक कितना नुकसान? इस जंग में अब तक के चार महीनों को अगर देखा जाए तो यूक्रेन के दावे के अनुसार, रूस के 34 हजार सैनिकों की जान जा चुकी है. जबकि 1500 रूसी टैंक, 756 आर्टिलरी सिस्टम, 99 एंटी एयरक्राफ्ट डिफेंस सिस्टम, 216 फाइटर जेट और 183 हेलिकॉप्टर गिराने का यूक्रेनी सेना ने दावा किया है. वहीं, रूसी दावा भी उससे कई गुना ज्यादा यूक्रेन के नुकसान का है. यूक्रेन से 80 लाख लोग देश छोड़कर भाग चुके हैं. रोज यूक्रेन के 200 सैनिकों की मौत हो रही है औसतन. अब तक के युद्ध में हर महीने 6000 यूक्रेनी सैनिक यानी 24 हजार से अधिक यूक्रेनी सैनिकों की जान जा चुकी है. यूक्रेन के लगभग सभी बड़े शहर रूसी बमबारी की तबाही झेल रहे हैं.
सिस्टम ठप, आर्थिक नुकसान बड़ा आर्थिक मोर्चे पर देखें तो यूक्रेन को 600 बिलियन डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है. देश का पूरा सिस्टम ठप है. यूक्रेन जंग में जुटा है तो उसके सहयोग के लिए उतरे यूरोप के देशों और अमेरिका तक को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. रूसी गैस की सप्लाई बंद होने से यूरोप में ईंधन का संकट है, भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में तेल के साथ-साथ और भी जरूरी सामानों की सप्लाई बाधित हुई है और खर्च काफी बढ़ गया है. दुनिया भर में कई कंपनियां इस युद्ध के कारण संकट में आ गई हैं और लोगों को रोजगार के संकट से जूझना पड़ रहा है. उधर तमाम बड़ी कंपनियां रूस छोड़कर जा चुकी हैं. अमेरिका और यूरोप ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. आम रूसी लोगों के आर्थिक हालात संकट वाले हैं.

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