
अमेरिकी कोर्ट ने टैरिफ को माना अवैध... जानें राष्ट्रपति ट्रंप के पास अब क्या ऑप्शन हैं
AajTak
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय आपातकाल कानून के तहत डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को रद्द कर उनकी आक्रामक आर्थिक नीति को बड़ा झटका दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार युद्ध की दिशा बदलती दिख रही है. फैसले के बाद ट्रंप के सामने तीन विकल्प बताए जा रहे हैं—इमरजेंसी पावर से सीमित अवधि तक टैरिफ जारी रखना, संसद से कानून पारित कराना या अलग-अलग देशों के साथ ट्रेड डील करना.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय आपातकाल कानून के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए टैरिफ को रद्द कर दिया. वैश्विक स्तर पर बड़े असर वाले इस फैसले से ट्रंप की आक्रामक आर्थिक नीतियों को बड़ा झटका लगा है. उनके सत्ता में लौटने के बाद दोबारा शुरू हुए वैश्विक व्यापार युद्ध की दिशा बदलती दिख रही है. सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद अब ट्रंप क्या करेंगे.
अब क्या करेंगे ट्रंप?
नियमों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति के पास अब तीन विकल्प हैं. पहला, ट्रंप के पास इमरजेंसी पावर है, जिससे वह कुछ महीनों के लिए टैरिफ जारी रख सकते हैं. दूसरा, वह टैरिफ पर बिल ला सकते हैं और संसद के दोनों सदनों से पास करवाकर कानून बना सकते हैं. तीसरा, वह कोर्ट की बात मानें और अलग-अलग देशों से ट्रेड डील करें.
ट्रंप ने टैरिफ को रद्द करने के अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कड़ी आलोचना की है. ट्रंप ने इस निर्णय को 'शर्मनाक' बताते हुए कहा कि उनके पास इसके लिए एक बैकअप प्लान भी तैयार है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने संकेत दिया कि वह अपनी आर्थिक नीति को आगे बढ़ाने के लिए वैकल्पिक रास्ते अपना सकते हैं.
अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि ट्रंप के पास इस तरह टैरिफ लागू करने का कानूनी अधिकार नहीं था और उन्होंने राष्ट्रीय आपातकाल कानून का सहारा लेकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया. कोर्ट के मुताबिक संबंधित कानून राष्ट्रपति को व्यापार को विनियमित करने की अनुमति देता है, लेकिन टैरिफ लगाने का स्पष्ट अधिकार नहीं देता.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.

आज सबसे पहले आपको उस रिपोर्ट के बारे में बताएंगे, जिसके मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हमले की तारीख मुकर्रर कर दी है. और ये हमला इस हफ्ते के आखिर तक हो सकता है. ट्रंप ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि ईरान नहीं माना तो हमला होगा. रमज़ान का महीना शुरू हो गया है और ये मुसलमानों के लिए पाक महीना माना जाता है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर रमजान के महीने में हमला किया तो मुस्लिम देश क्या करेंगे?











