
Russia-Ukraine Conflict: रूस-अमेरिका के कोल्ड वॉर में पिस गए ये 7 देश, Ukraine का भी हाल ऐसा ही ना हो जाए...
AajTak
Russia-Ukraine Conflict पर पूरी दुनिया की निगाहें हैं. रूस के एक लाख तीस हजार सैनिक यूक्रेन की सीमा पर तैनात हैं. किसी भी हमले का जवाब देने के लिए अमेरिका और नाटो की सेना ने भी यूरोप में तैनाती बढ़ा दी है. रूस-अमेरिका के बीच तनाव के कारण पिछले कुछ दशकों में कई देशों को भारी नुकसान हुआ है. लोगों को आशंका है कि अगर जंग छिड़ी तो तीसरे विश्व युद्ध की आशंका बन सकती है.
एक मशहूर कहावत है कि 'जब एक बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है'... दो विश्वयुद्ध देख चुकी दुनिया आज कुछ इसी तरह के भय से फिर आशंकित है. दुनिया की दो बड़ी महाशक्तियों अमेरिका और रूस में पिछले कुछ सालों से बढ़े तनाव का असर अब दिख रहा है पूर्वी यूरोप के देश यूक्रेन को लेकर. जिसकी सीमा पर एक लाख 30 हजार रूसी सैनिक डेरा डाले हुए हैं. वहां तैनात तोप-लड़ाकू विमानों और जंग के अत्याधुनिक हथियारों की तस्वीरें पूरी दुनिया में चर्चा का कारण बनी हुई हैं. कभी भी जंग शुरू हो जाने के आसार जताए जा रहे हैं और जवाबी कार्रवाई के लिए यूक्रेन के पक्ष में अमेरिका की अगुवाई वाले NATO की सेना ने भी पूर्वी यूरोप में मोर्चाबंदी बढ़ा दी है. दोनों ओर से जंगी जहाजों से लेकर वॉरशिप तक की तैनाती ने पूरी दुनिया को एक और वर्ल्ड वॉर की आशंकाओं से थर्रा कर रख दिया है.

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने आजतक के साथ खास बातचीत में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बात की. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने अच्छे रिश्तों के बारे में बताया और कहा कि मोदी से बात करने के लिए उन्हें सोशल मीडिया की आवश्यकता नहीं होती, वे सीधे फोन पर बात कर लेते हैं. डोनाल्ड ट्रंप पर हल्के तंज भी उन्होंने दिए. साथ ही, महात्मा गांधी को अपने जीवन का आदर्श भी बताया जो उनके दृष्टिकोण और जीवनशैली का प्रतीक है.

मध्य पूर्व में बढ़ती अमेरिकी सैन्य तैनाती के बीच ईरान पर संभावित हमले की आशंकाएं तेज हैं. सीमित स्ट्राइक से लेकर शासन परिवर्तन, सैन्य शासन, क्षेत्रीय जवाबी हमले और होर्मुज स्ट्रेट में बाधा तक कई परिदृश्य सामने हैं. किसी भी कदम का असर सिर्फ ईरान नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.










