
Ramadan Special: इस्लाम का अहम फर्ज है ‘जकात’, रमजान में क्यों बढ़ जाता है इसका महत्व
ABP News
Ramadan Special: रमजान के पाक महीने में रोजा, इबादत, नमाज, तरावीह के साथ ही जकात (दान) का महत्व भी बढ़ जाता है. ईद की नमाज से पहले मुसलमान जकात देते हैं. इस्लाम में जकात देने के नियम बताए गए हैं.
Ramadan Special: माह-ए-रमजान का मुकद्दस महीना चल रहा है. रोजेदार नियमित रूप से रोजा रख रहे हैं और धीरे-धीरे रमजान अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचने वाला है. रमजान का महीना अल्लाह की इबादत, संयम, रोजा, नमाज, कुरान के लिए खास माना जाता है. इसी के साथ इस महीने जकात का महत्व भी बढ़ जाता है. जकात का अर्थ होता है ‘दान’, लेकिन जकात देने के कुछ नियम होते हैं.
इस्लाम का अहम फर्ज है जकात
इस्लाम धर्म में मुख्य रूप से 5 फर्ज (स्तंभ) हैं, जिसमें जकात भी एक है. जकात का अर्थ होता है अपनी कमाई का एक निश्चित हिस्सा जरूरतमंदों और गरीबों में बांटना. जकात देना सिर्फ दान नहीं है, बल्कि यह बहुत ही सवाब का काम है, जिसे इस्लाम में धार्मिक कर्तव्य माना जाता है. इसलिए हर सक्षम मुसलमान पर जकात अदा करना फर्ज है. खासतौर पर रमजान में जकात का महत्व अन्य दिनों की अपेक्षा कई गुणा बढ़ जाता है. क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि, रमजान में किए कामों का 70 गुणा अधिक सवाब मिलता है.
इस्लाम में ऐसी मान्यता है कि, अल्लाह ने अपने बंदों को जो भी दौलत और नेमतें प्रदान की हैं, उनमें गरीब और जरूरतमंदों का भी हक है. इसलिए जकात देने से न केवल जरूरतमंदों की मदद होती है, बल्कि देने वाले की संपत्ति भी पाक और पवित्र मानी जाती है.













