
Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी व्रत की संपूर्ण व्रत कथा पढ़ें, बरसेगी विष्णु जी की कृपा
ABP News
Papmochani Ekadashi 2026: पापमोचनी एकादशी व्रत 15 मार्च 2026 को है. भगवान श्रीहरि की पापमोचनी शक्ति इस भयंकर पाप कर्म से भी सहज ही मुक्ति दिलाने में सक्षम है. पापमोचनी एकादशी व्रत की कथा यहां पढ़ें.
Papmochani Ekadashi 2026: राजा मान्धाता ने धर्म के गुह्यतम रहस्यों के ज्ञाता महर्षि लोमश से पूछा, 'हे ऋषिश्रेष्ठ! मनुष्य के पापों का मोचन किस प्रकार सम्भव है? कृपा कर कोई ऐसा सरल उपाय बतायें, जिससे सहज ही पापों से छुटकारा मिल जाये'
महर्षि लोमश ने कहा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम पापमोचनी एकादशी है. उसके व्रत के प्रभाव से मनुष्यों के अनेक पाप नष्ट हो जाते हैं. मैं तुम्हें इस व्रत की कथा सुनाता हूँ, प्राचीन समय में चैत्ररथ नामक एक वन था. उसमें अप्सरायें किन्नरों के साथ विहार किया करती थीं. वहां सदैव वसन्त का मौसम रहता था, अर्थात उस स्थान पर सदैव नाना प्रकार के पुष्प खिले रहते थे. कभी गन्धर्व कन्यायें विहार किया करती थीं,तो कभी स्वयं देवेन्द्र अन्य देवताओं के साथ क्रीड़ा किया करते थे.
उसी वन में मेधावी नाम के एक ऋषि भी तपस्या में लीन रहते थे. वह भगवान शिव के अनन्य भक्त थे. एक दिन मञ्जुघोषा नामक एक अप्सरा ने उनको मोहित कर उनकी निकटता का लाभ उठाने की चेष्टा की, इसीलिये वह कुछ दूरी पर बैठ वीणा बजाकर मधुर स्वर में गाने लगी. उसी समय शिव भक्त महर्षि मेधावी को कामदेव भी जीतने का प्रयास करने लगे.
कामदेव ने उस सुन्दर अप्सरा के भ्रू का धनुष बनाया. कटाक्ष को उसकी प्रत्यन्चा बनायी और उसके नेत्रों को मञ्जुघोषा अप्सरा का सेनापति बनाया. इस तरह कामदेव अपने शत्रु विजय प्राप्त करने हेतु तैयार थे. उस समय महर्षि मेधावी भी युवावस्था में थे. उस मुनि को देखकर कामदेव के वश में हुयी मञ्जुघोषा ने धीरे-धीरे मधुर वाणी से वीणा पर गायन आरम्भ किया तो महर्षि मेधावी भी मञ्जुघोषा के मधुर गायन पर तथा उसके सौन्दर्य पर मोहित हो गये. वह अप्सरा मेधावी मुनि को कामदेव से पीड़ित जानकर उनसे आलिङ्गन करने लगी.













