
PR के लिए मार, नंबर गेम में हार....भारतीयों के लिए सपना बनता जा रहा कनाडा में बसना!
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पंजाब की हरप्रीत कौर 2019 में कनाडा आई थीं. PR की उम्मीद में यहां पढ़ाई की, जॉब की, खूब मेहनत की, लेकिन उनका CRS स्कोर सिर्फ 434 रहा — जबकि 2025 में PR ड्रॉ का कटऑफ 500 से ऊपर बना हुआ है. यही वजह है कि हरप्रीत जैसे हज़ारों भारतीय अब भी इंतज़ार कर रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि कनाडा की इमीग्रेशन पॉलिसी और लिमिटेड PR टारगेट्स ने कनाडा में बसने का सपना मुश्किल बना दिया है.
भारत का एक तबका हमेशा से ऐसा रहा है, जो विदेश में बसने की चाह रखता है. इसमें भी भारतीयों की पहली पसंद अमेरिका या ब्रिटेन जैसे देश रहे. यहां पढ़ने और कामकाज के लिए बड़ी संख्या में भारत से लोग पहुंचते हैं. लेकिन वक्त के साथ इन देशों का मिजाज बदला. वे प्रवासियों पर लगाम कसने लगे. यही वो वक्त था, जब भारतीयों ने अपनी मंजिल बदली और उनका नया ठिकाना बना, ‘कनाडा’.
कनाडा के पास अपनी आबादी काफी कम थी. उसे कामकाजी लोग चाहिए थे. भारतीयों ने ये मौका लपक लिया. साल 2015 में जस्टिन ट्रूडो सरकार ने इमिग्रेशन प्रोसेस को बेहद आसान कर दिया. कनाडा ने एक्सप्रेस-एंट्री सिस्टम शुरू किया, जो हाई स्किल्ड वर्कर्स को परमानेंट रेसिडेंसी (PR) के लिए आमंत्रित करता है, भले ही आपके पास कनाडा में नौकरी का कोई ऑफर ना हो. यानी कनाडा आकर नौकरी ढूंढो या अपना कोई काम शुरू करो. इसी बीच आप वहां PR पा सकते हैं. इसके बाद से कनाडा आने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ती रही.
PR मिलने के बाद कोई भी शख्स कनाडा में कनाडाई नागरिक की तरह ही हर सुविधा हासिल कर लेता है, सिवाए वोट देने के. वोट का अधिकार यहां की नागरिकता मिलने के बाद मिलता है, जो PR का अगला कदम है.
कनाडा का PR पाने के लिए कनाडा सरकार का विभाग इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) कैंडिडेट की उम्र, पढ़ाई, भाषा, जीवनसाथी की पढ़ाई, कनाडा में जॉब ऑफर जैसे अलग-अलग मानकों के आधार पर कुछ स्कोर तय करता है, जो ये बताता है कि आप कनाडा में रहने और यहां नौकरी या अपना बिजनेस करने के लिए कितने लायक हैं. ये कॉम्प्रिहेंसिव रैंकिंग सिस्टम (CRS) कहलाता है. PR के लिए अप्लाई करने वाले शख्स का CRS स्कोर IRCC की जारी की हुई CRS कट-ऑफ रेंज के बराबर या उससे ज्यादा होना चाहिए.
कैसे तय होता है CRS?
एक इमिग्रेशन फर्म की मैनेजर इशमिंदर उदाहरण से समझाती हैं.

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