
आंखों देखी: मुंबई में LPG क्राइसिस ने 150 साल पुराने 'डब्बावाला सिस्टम' पर लगाया ब्रेक, आय हुई आधी
AajTak
मुंबई में रसोई गैस सिलेंडर की कमी ने 150 साल पुराने डब्बावाला सिस्टम की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है. मेस और छोटे किचन बंद होने से टिफिन की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर डब्बावालों की आय पर पड़ा है. जहां पहले हजारों टिफिन रोजाना पहुंचते थे, अब आधे से भी कम रह गए हैं.
मुंबई में रसोई गैस सिलेंडर की कमी की वजह से पिछले 150 सालों से स्थापित मुंबई डब्बावाला संगठन के कामकाज पर भी असर पड़ा है. डब्बावाले जिन ग्राहकों तक खाना पहुंचाने थे उनमें से कुछ की टिफिन सर्विस बंद हो गई है, क्योंकि उनका खाना मेस से आता था और गैस सिलेंडर नहीं मिलने से वे मेस बंद चल रहे हैं. इतना ही नहीं डब्बा पहुंचाने वाले कर्मचारियों की आय भी लगभग आधी हो गई है.
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की पहचान रहे 150 साल पुराने डब्बावाला सिस्टम पर अब गैस सिलेंडर की कमी का सीधा असर देखने को मिल रहा है. सुबह-सुबह चर्चगेट से लेकर दादर और बांद्रा तक, जहां पहले सफेद गांधी टोपी पहने डब्बावाले साइकिल और लोकल ट्रेन के जरिए हजारों टिफिन पहुंचाते नजर आते थे, वहीं अब कई जगहों पर उनकी रफ्तार धीमी पड़ गई है.
डब्बावालों के मुताबिक, इस संकट की सबसे बड़ी मार उन ग्राहकों पर पड़ी है जो मेस या छोटे किचन से खाना मंगवाते थे. गैस सिलेंडर की आपूर्ति बाधित होने के कारण कई मेस बंद हो चुके हैं, जिससे टिफिन सेवा भी प्रभावित हुई है.
मुंबई डब्बावाला संगठन के जनरल सेक्रेटरी किरण गावंडे बताते हैं, 'सिलेंडर की कमी की वजह से हमारे ग्राहक कम हो गए हैं. पहले जहां रोजाना हजारों टिफिन चलते थे, अब उनमें काफी गिरावट आई है. इसका सीधा असर हमारी आय पर पड़ा है.'
वहीं संगठन के अध्यक्ष उल्हास मुके ने कहा, 'डब्बावाला सिस्टम पिछले 150 सालों से बिना रुके चलता आ रहा है, लेकिन इस तरह की गैस आपूर्ति की समस्या ने पहली बार हमारे कामकाज को इस स्तर पर प्रभावित किया है. कई मेस बंद होने से टिफिन की संख्या कम हो गई है. इतना ही नहीं, डिब्बावालों की आय भी लगभग आधी हो गई है, ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में हमें ही अपनी जीविका के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा.'
ग्राहकों पर भी असर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान जंग पर राज्यसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है. इसने पूरे विश्व को गंभीर ऊर्जा संकट में डाल दिया है. इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है. गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं. उनके जीवन की रक्षा भी भारत के लिए चिंता का विषय है. होर्मुज स्ट्रेट में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हैं. उनके क्रू मेंबर्स भी अधिकतर भारतीय हैं. यह भी भारत के लिए चिंता का विषय है. ऐसे में जरूरी है कि भारत के इस उच्च सदन से दुनिया में संवाद का संदेश जाए. हम गल्फ के देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं. हमने डीएस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी लगातार बात की है. भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है.

राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) ने 10वीं कक्षा का फाइनल रिजल्ट 2026 घोषित कर दिया है. इस वर्ष लगभग 10 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए. परिणाम आधिकारिक वेबसाइट rajeduboard.rajasthan.gov.in और rajresults.nic.in पर लाइव कर दिए गए हैं. बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया रिकॉर्ड समय में पूरी की है ताकि नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो सके.











