
PM Modi in US: एक तरफ अमेरिका, दूसरी तरफ रूस... कैसे दो शक्तियों के बीच 'पावर बैलेंस' बना रहा है भारत?
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के लिए रवाना हो चुका है. ये उनकी पहली स्टेट विजिट है. पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्नी जिल बाइडेन के बुलावे पर अमेरिका पहुंचे हैं. पीएम मोदी का ये दौरा ऐसे समय हो रहा है जब रूस-यूक्रेन संकट पर भारत के रवैये पर सवाल उठते रहे हैं. ऐसे में जानते हैं कि भारत इन दोनों देशों के बीच पावर बैलेंस बनाने में कितना कामयाब रहा है?
न तो अमेरिका के लिए रूस को छोड़ा जा सकता है. और न ही रूस के लिए अमेरिका को... ये भारत की नीति है. और भारत इसे बखूबी मानता है. आज से नहीं, बल्कि दशकों से. या यूं कहें कि हमेशा से.
इसे ऐसे समझिए कि यूक्रेन पर हमले के लिए भारत ने न तो सीधे-सीधे रूस का साथ दिया और न ही उसके खिलाफ रहा. संयुक्त राष्ट्र में जब रूस के खिलाफ कोई प्रस्ताव आया तो भारत ने इससे दूरी बना ली. लेकिन, भारत ने हमेशा से यूक्रेन में आम लोगों के मारे जाने की निंदा की.
भारत के इस रवैये ने अमेरिका को नाराज भी किया. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कई बार कहा कि रूस को लेकर भारत का रवैया 'ढुलमुल' रहा है.
अब इन्हीं बाइडेन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्टेट विजिट के लिए बुलाया है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्नी जिल बाइडेन के बुलावे पर अमेरिका पहुंचे हैं. पीएम मोदी तीन दिन अमेरिका में रहेंगे. इस दौरे में पीएम मोदी व्हाइट हाउस में जो बाइडेन के साथ बैठक करेंगे. पीएम मोदी के सम्मान में स्टेट डिनर का आयोजन होगा. अगले दिन कांग्रेस के ज्वॉइंट सेशन को संबोधित करेंगे. आखिरी दिन उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से भी पीएम मोदी की मुलाकात होगी.
खैर, एक तरह रूस को पकड़े रहना और दूसरी तरफ अमेरिका को भी नाराज न करना... दिखाता है कि भारत किस तरह से 'पावर बैलेंस' बना रहा है.
पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा का फुल कवरेज यहां देखें

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