
'PM के आदेश बिल्कुल स्पष्ट थे', राहुल गांधी के आरोपों पर बोले सेना के पूर्व ब्रिगेडियर
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सेवानिवृत्त सेना अधिकारी ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने राहुल के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के आदेश स्पष्ट थे और सेना को जो करना जरूरी था, वह किया. उन्होंने राहुल गांधी पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया. ब्रिगेडियर गुप्ता ने कहा कि रिटायरमेंट के बाद ऑपरेशनल फैसलों पर टिप्पणी करना गलत है और कांग्रेस को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी भूमिका पर पुनर्विचार करना चाहिए.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने की अप्रकाशित किताब के कुछ अंशों का हवाला देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की.
उन्होंने दावा किया कि भारत-चीन सीमा विवाद के दौरान पीएम मोदी की ओर से सेना को स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए थे. अब इन आरोपों पर सेवानिवृत्त सेना अधिकारी और सुरक्षा विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने प्रतिक्रिया दी है और राहुल के आरोपों का खंडन किया है. साथ ही उन्होंने नेता प्रतिपक्ष पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया.
'साफ था पीएम का आदेश'
राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए सेवानिवृत्त सेना अधिकारी और सुरक्षा विश्लेषक ब्रिगेडियर अनिल गुप्ता ने बुधवार को कहा, 'प्रधानमंत्री का निर्देश बिल्कुल स्पष्ट था जो करना जरूरी है, वह करो. सेना का यही काम है.'
रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने राहुल से पूछा सवाल उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा, 'क्या कोई गंभीरता से ये मानता है कि एलएसी पर तैनात सैनिकों को युद्ध (लड़ाई) की स्थिति में कदम-दर-कदम राजनीतिक निर्देशों की जरूरत है? और किस तरह के निर्देश की जरूरत थी?' उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता द्वारा की गई आलोचना सशस्त्र बलों के कामकाज की खराब समझ को दिखाता है. साथ ही उन्होंने राहुल पर प्रासंगिक बने रहने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया.
कई ऑपरेशन का दिया उदाहरण अपने तर्क को मजबूत करने के लिए उन्होंने कई ऑपरेशनल उदाहरण दिए, जहां बिना प्रत्यक्ष राजनीतिक मंजूरी के निर्णायक सैन्य कार्रवाई की गई. ब्रिगेडियर ने अपनी सेवा को याद करते हुए बताया कि सितंबर 1992 में भारतीय सेनाओं ने कारगिल के काकसर बटालियन डिफेंडेड एरिया में दुश्मन के ठिकानों को तबाहा कर दिया और बंकरों को नष्ट कर दिया. इसमें एयर डिफेंस गन, इन्फैंट्री मोर्टार और आर्टिलरी का इस्तेमाल किया गया. इसके लिए किसी प्रधानमंत्री से नहीं पूछा गया, सिर्फ कोर मुख्यालय को ये पता था.' उन्होंने 1995 की एक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें भारतीय इग्ला शोल्डर-फायर्ड मिसाइल से पाकिस्तानी हेलीकॉप्टर को मार गिराया था. ये सियाचिन ब्रिगेड कमांडर के स्पष्ट आदेश पर हुआ. इतिहास में और पीछे जाते हुए उन्होंने 1967 और 1971 की घटनाओं का उदाहरण दिया, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह ने नाथू ला पर चीनी सेनाओं के खिलाफ डटकर मुकाबला किया, भले ही पीछे हटने के आदेश थे. इसी तरह 1971 के युद्ध में उन्होंने राजनीतिक और उच्च सैन्य निर्देशों के खिलाफ मेघना नदी पार की, जो भारत की जीत और बांग्लादेश के निर्माण में निर्णायक साबित हुई.

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