
Ph.D दाखिले में आरक्षण देगा IIM अहमदाबाद, हाईकोर्ट से कहा- ये कठिन काम है, समय लगेगा
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उच्च न्यायालय में आईआईएम के हलफनामे में कहा गया है कि सर्वोत्तम उपयुक्त पद्धति में कुछ समय लगने की संभावना है. इसके साल 2025 तक पूरा होने की संभावना है. संस्थान ने कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है.
गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आईआईएम अहमदाबाद ने पीएचडी कार्यक्रम (Ph.D Programme) में एससी (SC), एसटी (ST) और ओबीसी (OBC) उम्मीदवारों के लिए आरक्षण (Reservation) लागू कर दिया दिया है. आईआईएम अहमदाबाद ने फिलहाल इसे लागू करने को कठिन काम बताया है. संस्थान का कहना है कि पीएचडी कार्यक्रम के लिए उपयुक्त छात्र मुश्किल से 2 से 3 हैं, इसलिए आरक्षण प्रदान करना ऑपरेशनली ढंग से बहुत कठिन है.
हालांकि आरक्षण प्रदान करने के लिए आईआईएमए ने निर्णय लिया है. संस्थान ने हाईकोर्ट को बताया है कि आरक्षित सीटों को अलग करने की पद्धति पर काम किया जा रहा है. आरक्षण प्रदान करने की कार्यप्रणाली तैयार करने के लिए आईआईएम अहमदाबाद में संकाय सदस्यों की एक आंतरिक समिति का गठन किया जा रहा है. आईआईएम अहमदाबाद के हलफनामे में कहा गया है कि नई परिस्थितियों और लंबे समय से प्रचलित प्रथा को ध्यान में रखते हुए, जहां पीएचडी कार्यक्रमों के प्रत्येक क्षेत्र में औसतन 2 से 3 छात्रों को प्रवेश दिया जाता है, समिति को एक कठिन कार्य का सामना करना पड़ रहा है.
उच्च न्यायालय में दाखिल आईआईएम के हलफनामे में कहा गया है कि सर्वोत्तम उपयुक्त पद्धति में कुछ समय लगने की संभावना है. इसके साल 2025 तक पूरा होने की संभावना है. सोमवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान, आईआईएम अहमदाबाद की ओर से पेश वकील ने पीठ को सूचित किया कि विचार-विमर्श के बाद तय हुआ है कि साल 2025 तक इसके पूरा होने की संभावना है. हालांकि संस्थान द्वारा आधिकारिक तौर पर कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है.
हलफनामे में कहा गया है कि हालांकि, पहले से लिए गए निर्णय के मद्देनजर, आईआईएमए की ओर से यह कहा गया है कि आईआईएमए में पीएचडी कार्यक्रमों में भी उचित आरक्षण प्रदान किया जाएगा. आईआईएम ए द्वारा अहमदाबाद उच्च न्यायालय में दायर हलफनामा में बताया गया है कि पीएचडी छात्रों में जाति आधारित आरक्षण प्रदान करने की पद्धति पर काम किया जा रहा है, इसमें समय लगेगा. सोमवार को उच्च न्यायालय के समक्ष मौखिक प्रस्तुतिकरण में आईआईएम के वकील ने अदालत को सूचित किया कि प्रक्रिया "2025 तक पूरी होने की संभावना है".
बता दें कि साल 2021 में हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि आईआईएम-ए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा शासित और वित्त पोषित संस्थान है, लेकिन यह पीएचडी कार्यक्रम (Ph.D Programme) में नामांकन प्रक्रिया के तहत केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2006 का उल्लंघन कर रहा है.

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