
PAK: शहबाज शरीफ की सिफारिश पर राष्ट्रपति अल्वी ने आधीरात को भंग की संसद
AajTak
संसद को भंग करने को लेकर जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि नेशनल असेंबली को संविधान के आर्टिकल 58 के तहत भंग किया गया है. बता दें कि शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति अल्वी को पत्र लिखकर संसद को भंग करने की सिफारिश की थी.
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सलाह पर बुधवार आधीरात को संसद भंग कर दी. संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली को पांच साल का संवैधानिक कार्यकाल पूरा होने से तीन दिन पहले ही भंग कर दिया गया है. इसके साथ ही शहबाज शरीफ सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया.
संसद को भंग करने को लेकर जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि नेशनल असेंबली को संविधान के आर्टिकल 58 के तहत भंग किया गया है. संसद का पांच साल का कार्यकाल आधिकारिक तौर पर 12 अगस्त को खत्म होना था.
बता दें कि शहबाज शरीफ ने राष्ट्रपति अल्वी को पत्र लिखकर संसद को भंग करने की सिफारिश की थी. आर्टिकल 58 के तहत अगर राष्ट्रपति संसद भंग करने के लिए प्रधानमंत्री की सिफारिश के 48 घंटे के भीतर असेंबली को भंग नहीं करते हैं तो यह स्वत: ही भंग हो जाएगी.
तीन दिन के भीतर अंतरिम प्रधानमंत्री का नाम होगा तय
संविधान से तहत शहबाज शरीफ और नेशनल असेंबली में नेता प्रतिपक्ष के पास केयरटेकर प्रधानमंत्री के नाम को अंतिम रूप देने के लिए तीन दिन का समय है. अगर केयरटेकर प्रधानमंत्री के लिए किसी नाम पर सहमति नहीं बन पाती है तो असेंबली स्पीकर द्वारा गठित समिति के समक्ष इस मामले को भेजा जाएगा. यह समिति तीन दिनों के भीतर अंतरिम प्रधानमंत्री के नाम पर मुहर लगाएगी. लेकिन अगर समिति भी तय समय के भीतर कोई फैसला नहीं ले पाती है तो अंतरिम पीएम के दावेदार लोगों के नाम को चुनाव आयोग के पास भेजा जाएगा. चुनाव आयोग दो दिनों के भीतर इस पर अंतिम फैसला लेगी.
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को संसद के निचले सदन के विदाई सत्र को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के नामों पर चर्चा करने के लिए गुरुवार को नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता राजा रियाज से मुलाकात करेंगे.

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि ईरान ने उन पर हमला किया या उनकी हत्या की साज़िश रची, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह से दुनिया के नक्शे से मिटा देगा. यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा सकता है. ट्रंप की इस धमकी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. ऐसे हालात में दोनों देशों के बीच शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता अभी भी कायम है. दावोस में दिए अपने भाषण में उन्होंने डेनमार्क को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह एहसानफरामोश निकला, क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने ग्रीनलैंड को दिया था, लेकिन अब डेनमार्क इसका सही उपयोग नहीं कर रहा है. ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है और वह इसे लेना चाहते हैं.

'PM मोदी की बहुत इज्जत करता हूं, जल्द अच्छी ट्रेड डील होगी', टैरिफ धमकियों के बीच ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने मीडिया संग बातचीत में भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि आपके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर मेरे मन में बहुत सम्मान है. वह बेहतरीन शख्स है और मेरे दोस्त हैं. हमारे बीच बेहतरीन ट्रेड डील होने जा रही है.

ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.









