
PAK: इमरान खान के करीबी शाह महमूद कुरैशी को बड़ा झटका, पांच साल के लिए नहीं लड़ पाएंगे चुनाव
AajTak
पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने जेल में बंद देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी शाह महमूद कुरैशी को सरकारी खुफिया जानकारी लीक करने के मामले में 10 साल कैद की सजा सुनाए जाने के मद्देनजर उन्हें पांच साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया.
पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने जेल में बंद देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी शाह महमूद कुरैशी को सरकारी खुफिया जानकारी लीक करने के मामले में 10 साल कैद की सजा सुनाए जाने के मद्देनजर उन्हें पांच साल के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया.
आठ फरवरी को पाकिस्तान में आम चुनाव पूर्व विदेश मंत्री कुरैशी (67) को ऐसे समय में अयोग्य ठहराया गया है जब आठ फरवरी को देश में आम चुनाव होने हैं. खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (पीटीआई) सरकार की कार्रवाई के बावजूद और अपने प्रसिद्ध चुनाव चिह्न बल्ले के बिना चुनाव लड़ रही है. खान और कुरैशी को गोपनीयता का उल्लंघन करने के मामले में मंगलवार को 10-10 साल जेल की सजा सुनाई गई.
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की खबर के अनुसार, पाकिस्तान निर्वाचन आयोग (ईसीपी) ने विशेष अदालत के 30 जनवरी, 2024 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संविधान और कानून के अनुसार कोई भी दोषी व्यक्ति चुनाव में भाग नहीं ले सकता है.
ईसीपी ने शनिवार को कहा, 'परिणामस्वरूप, मखदूम शाह महमूद कुरैशी ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान’ के संविधान के अनुच्छेद 63(1)(एच) के साथ चुनाव अधिनियम, 2017 की धारा 232 के तहत अयोग्य हो गए हैं.'
संघीय जांच एजेंसी द्वारा पिछले साल 15 अगस्त को 71 वर्षीय खान और कुरैशी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिसमें दोनों पर मार्च 2022 में वाशिंगटन में पाकिस्तान दूतावास द्वारा भेजे गए केबल को संभालने के दौरान गोपनीयता कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था. इससे पहले खान को पांच साल के लिए राजनीति से भी बैन किया जा चुका है.

कराची के गुल प्लाजा शॉपिंग मॉल में शनिवार रात लगी भीषण आग पर रविवार रात 10 बजे के बाद काबू पा लिया गया है. सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने इस दुखद घटना में एक दमकलकर्मी सहित 6 लोगों की मौत की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि राहत और बचाव कार्य के बीच 50 से 60 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश की जा रही है.

दुनिया में युद्ध का शोर बढ़ रहा है और शांति कमजोर पड़ रही है. अमेरिका ईरान को लेकर सख्त है जबकि ग्रीनलैंड को लेकर अपनी ताकत दिखा रहा है. रूस और यूक्रेन की जंग सालों से जारी है और यूरोप में न्यूक्लियर खतरे की बातें हो रही हैं. एशिया में इस्लामिक नाटो का गठन हो रहा है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकता है. ग्रीनलैंड की भू-राजनीति अब वैश्विक शक्ति संघर्ष का केंद्र बन चुकी है जहां अमेरिका, चीन और रूस अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. भारत सहित पूरे विश्व पर इन घटनाओं का गहरा प्रभाव पड़ रहा है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप के आठ देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की है. ये देश ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे की धमकी का विरोध कर रहे हैं. अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड को लेकर तनाव बढ़ गया है. मिनियापोलिस में अमेरिकी एजेंट की गोलीबारी के बाद प्रदर्शन जोर पकड़ रहे हैं. सीरिया में अमेरिकी सेना की कार्रवाई में एक प्रमुख आतंकवादी मारा गया. ईरान के सर्वोच्च नेता ने अमेरिका को देश में फैली अशांति का जिम्मेदार बताया. ट्रंप का गाजा पीस प्लान दूसरे चरण में पहुंचा है। जेपी मॉर्गन के सीईओ ने कहा कि उन्हें फेडरल रिजर्व चेयर बनने का कोई प्रस्ताव नहीं मिला. वेनेजुएला में अमेरिकी सैनिकों पर हमले के खिलाफ क्यूबा में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ.

पूर्वी चीन के जिआंगसू प्रांत के लियानयुंगांग में शुवेई न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण की शुरुआत हो गई है, जो चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना के तहत पहली परमाणु परियोजना है. यह दुनिया की पहली परियोजना है जिसमें हुआलोंग वन और हाई टेम्परेचर गैस कूल्ड रिएक्टर को एक साथ जोड़ा गया है, जिससे बिजली के साथ हाई-क्वालिटी स्टीम भी तैयार होगी.

ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के दबाव के खिलाफ डेनमार्क के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिनमें कोपेनहेगन में अमेरिकी दूतावास तक मार्च भी शामिल रहा. इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर दबाव बढ़ाते हुए डेनमार्क समेत आठ यूरोपीय देशों से आने वाले सामान पर 1 फरवरी से 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है.








