
NSA अजीत डोभाल की सुरक्षा में चूक का मामला, 3 कमांडो बर्खास्त
AajTak
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की सुरक्षा में लगे 3 कमांडो को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है. फरवरी के महीने में एनएसए डोभाल के घर में घुसपैठ की एक कोशिश की गई, जिसे उनकी सुरक्षा में चूक माना गया. इसी के मद्देनजर ये कड़ी कार्रवाई हुई है.
देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की सुरक्षा में चूक से जुड़े एक मामले में कार्रवाई करते हुए सरकार ने 3 कमांडो को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. ये कमांडो उस वक्त एनएसए की सुरक्षा में लगे थे, जब फरवरी में एक गाड़ी उनके घर के गेट तक पहुंच गई थी. इस मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था.
गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों ने जानकारी दी है कि VIP सुरक्षा से जुड़े DIG और कमांडेंट का ट्रांसफर किया गया है.
फरवरी के महीने में एक शख्स ने सुबह करीब 7 बजकर 45 मिनट पर कार लेकर अजीत डोभाल (Ajit Doval) की कोठी में घुसने की कोशिश की थी. लेकिन वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने सही वक्त पर उस शख्स को रोककर हिरासत में ले लिया था. शुरुआती जांच में शख्स मानसिक रूप से परेशान दिख रहा था.
गिरफ्तार शख्स की पहचान कर्नाटक के बेंगलुरु में रहने वाले शांतनु रेड्डी के तौर पर की गई. बताया गया था कि उसने नोएडा से रेड कलर की SUV कार किराए पर ली थी. इसी कार को लेकर वह अजीत डोभाल के घर पहुंचा था. कार को अंदर घुसाने की कोशिश के दौरान ही रेड्डी को पकड़ लिया गया. NSA अजीत डोभाल की सुरक्षा CISF करती है. उनको गृह मंत्रालय की तरफ से Z+ कैटेगिरी की सुरक्षा मिली हुई है.
पकड़े जाने के बाद शख्स कुछ बड़बड़ा भी रहा था. उसका कहना था कि उसकी बॉडी में किसी ने चिप लगा दिया है और उसे रिमोट से कंट्रोल किया जा रहा है. हालांकि, जांच में उसकी बॉडी से कोई चिप नहीं पाया गया.
अजीत डोभाल को Z+ कैटेगिरी की सुरक्षा मिली है, उनके चारों तरफ कड़ा सुरक्षा पहरा होता है. इसमें 58 कमांडों शामिल होते हैं. इसमें 10 आर्म्ड स्टैटिक गॉर्ड, 6 PSO, 24 जवान, 5 वाचर्स (दो शिफ्ट में) शामिल होते हैं.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

दावोस में भारत वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करने और एक बेहतर भविष्य बनाने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है. इस संदर्भ में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से खास बातचीत की गई जिसमें उन्होंने बताया कि AI को लेकर भारत की क्या योजना और दृष्टिकोण है. भारत ने तकनीकी विकास तथा नवाचार में तेजी लाई है ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रह सके. देखिए.

महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.

नोएडा के सेक्टर 150 में इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. हादसे के जिम्मेदार बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों पर भी गाज गिरी है. प्रशासन ने अब भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं.

महाराष्ट्र के ठाणे में तीन नाबालिग लड़कियों के लापता होने से सनसनी फैल गई. कल्याण के बारावे गांव से दो सगी बहनें और उनकी 13 साल की भांजी घर से निकलने के बाद वापस नहीं लौटीं. परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. एक अहम सूचना के आधार पर पुलिस टीम को लखनऊ भेजा गया है, जहां लड़कियों की तलाश की जा रही है.

छत्तीसगढ़ के रायपुर में मिड-डे मील योजना से जुड़े हजारों रसोइया और सहायिकाएं अपनी मांगों को लेकर तूता मैदान में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. रसोइया संघ के अध्यक्ष के अनुसार, उन्हें मात्र 66 रुपये प्रतिदिन मानदेय मिलता है, जो उनके परिवार का खर्च चलाने के लिए अपर्याप्त है. ठंड के बावजूद वे 22 दिनों से धरना दे रहे हैं पर शासन के कोई प्रतिनिधि उनसे अब तक नहीं मिले हैं.

आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने चार शंकराचार्य पीठों की स्थापना की. उद्देश्य था हिंदू धर्म और दर्शन को बचाना और आगे बढ़ाना. ऐसा हुआ भी. लेकिन पिछली एक सदी में कई और शंकराचार्य पीठ गढ़ ली गईं. इन पर बैठने वालों में कलह आम हुई. चुनावी लाभ, उत्तराधिकार का झगड़ा, राजनीतिक हस्तक्षेप, और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं ने इस पद को धार्मिक से ज्यादा राजनीतिक बना दिया है.





