
Nepal में Citizenship Amendment Bill पास, जानें भारत पर क्या होगा असर
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नेपाल की संसद में नागिरकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) पास हो गया है. हालांकि, राज्यसभा में इस पर चर्चा होनी बाकी है. इसके बाद अब नेपाल के पुरुषों से शादी करने वाली विदेशी महिलाओं को नागरिकता हासिल करने के लिए 7 साल इंतजार करना पड़ेगा.
नेपाल की संसद में पहला नागिरकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) पास हो गया है. इस बिल पर पिछले 2 साल से चर्चा चल रही थी. नेपाल की कई राजनीतिक पार्टियां इस बिल पर सहमत नहीं थीं. हालांकि, राजनीतिक गतिरोध के बाद भी नेपाल की संसद में बिल पास कर दिया गया.
इस बिल पर 2020 से नेपाल की प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) में चर्चा चल रही थी. लेकिन कई राजनीतिक दल इसका समर्थन करने से बच रहे थे. इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि नेपाल के पुरुषों से शादी करने वाली विदेशी महिलाओं को अब नागरिकता हासिल करने के लिए 7 साल इंतजार करना पड़ेगा.
नेपाल-भारत बॉर्डर ने नजदीक रहने वाले भारतीयों पर इस बिल का काफी प्रभाव पड़ेगा. दरअसल, बॉर्डर के दोनों तरफ बड़ी तादाद में ऐसे लोग रहते हैं, जिनके बीच कई पीढ़ियों से रोटी और बेटी का रिश्ता रहा है. ऐसे में अब किसी भारतीय लड़की की नेपाल के शख्स से होने पर उसे नागरिकता के लिए 7 साल तक इंतजार करना होगा.
नेपाल की संसद के निचले सदन में बुधवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक हुई. इस बैठक में गृह मंत्री बाल कृष्ण खंड ने सांसदों के सामने नेपाल का पहला नागरिकता संशोधन विधेयक 2022 पेश किया. इस दौरान उन्होंने कहा, 'नेपाल नागरिकता अधिनियम 2006 में संशोधन के लिए विधेयक संसद में पेश किया गया है.
गृहमंत्री ने आगे कहा कि हजारों लोग ऐसे हैं, जिनके माता-पिता नेपाल के नागरिक हैं, लेकिन फिर भी वे नागरिकता प्रमाण पत्र से वंचित हैं. नागरिकता प्रमाण पत्र की कमी के कारण वे लोग शिक्षा और दूसरी सुविधाओं से वंचित हैं. इन सब चीजों के देखते हुए मैं नए विधेयक का समर्थन करने और नया कानून बनाकर उसे लागू करने के लिए मदद करने की अपील करता हूं.
बाल कृष्ण खंड ने आगे कहा कि नया विधेयक गुरुवार को संसद के उच्च सदन या नेशनल असेंबली में पेश किया जाएगा. इस दौरान विचार-विमर्श भी होगा. इससे पहले पिछले हफ्ते मुख्य विपक्षी पार्टी सीपीएन-यूएमएल के सांसदों के विरोध के बाद नेपाल की सरकार ने प्रतिनिधि सभा से नागरिकता विधेयक वापस ले लिया था. 2018 में तत्कालीन केपी शर्मा ओली की सरकार ने संसद सचिवालय में बिल रजिस्टर कराया था.

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