
सऊदी-UAE-कतर ने ले लिया ये एक्शन तो रुक जाएगी जंग? क्या है 'न्यूक्लियर ऑप्शन' जो ट्रंप को करेगा मजबूर
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ईरान-इजरायल युद्ध के कारण होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से खाड़ी देशों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. इस नुकसान के बीच अगर खाड़ी देश चाहें तो युद्ध बहुत जल्द खत्म हो सकता है. वो फोर्स मेज्योर घोषित शक्ति संतुलन अपने पक्ष में झुकाकर इजरायल अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए मजबूर कर सकते हैं.
ईरान जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के जरिए कमर्शियल जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारी नुकसान झेल रहे खाड़ी देश चाहें तो इसका रणनीतिक फायदा उठा सकते हैं और ट्रंप पर दबाव डालकर युद्ध को बहुत जल्द खत्म करा सकते हैं.
होर्मुज के बंद होने से खाड़ी देशों से आने वाला लगभग 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का निर्यात बाधित हुआ है. इससे खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देश एक तरह का ऊर्जा 'न्यूक्लियर ऑप्शन' अपना सकते हैं यानी अपने तेल और गैस निर्यात पर फोर्स मेज्योर (force majeure) घोषित करना और जानबूझकर ग्लोबल सप्लाई का अतिरिक्त 20% बाजार से हटा देना.
फोर्स मेज्योर एक कानूनी प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण कोई पक्ष अपने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को पूरा करने में असमर्थ हो जाता है.
मध्य-पूर्व में वर्तमान में जो हालात बने हैं, उसे देखते हुए कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की कंपनियों ने फोर्स मेज्योर घोषित किया है. फोर्स मेज्योर घोषित करने से कॉन्ट्रैक्ट अस्थायी रूप से निलंबित हो जाता है और जुर्माने से राहत मिलती है. हालांकि, अगर खाड़ी देश मिलकर ऐसा करते हैं तो सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी.
मिडिल ईस्ट के एक प्रमुख अखबार में प्रकाशित एक विश्लेषण के अनुसार, अगर खाड़ी देश एक साथ मिलकर ऐसा कदम उठाते हैं तो तुरंत दुनिया को आर्थिक झटका लगेगा. यह झटका अमेरिका और इजरायल को ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर सकता है.
ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज से रोजाना करीब 135 जहाज गुजर रहे थे. लेकिन ईरान ने होर्मुज को लगभग बंद कर दिया है और केवल एकाध जहाज ही यहां से गुजर पा रहे हैं.

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