
NCP के दोनों गुटों के विलय की मिस्ट्री! वास्तव में अजित पवार चाहते क्या थे?
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अजित पवार के आकस्मिक निधन ने महाराष्ट्र में राजनीति समीकरण को प्रभावित किया है. एनसीपी के दोनों गुट संभावित विलय को लेकर विरोधाभासी दावे कर रहे हैं. शरद पवार गुट का कहना है कि अजित पवार विलय चाहते थे, जबकि अजित गुट के वरिष्ठ नेताओं ने इस तरह की किसी बातचीत से इनकार किया है.
अजित पवार के आकास्मिक निधन ने महाराष्ट्र की राजनीति को अनिश्चितता के तूफान में धकेल दिया है. दोनों एनसीपी गुटों के संभावित विलय को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आए हैं. शरद पवार का कहना है कि एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर अजित पवार के साथ एक उच्चस्तरीय वार्ता चल रही थी, जबकि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार के गुट के वरिष्ठ नेताओं ने ऐसी किसी भी बातचीत से साफ इनकार किया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि अजित पवार उनके साथ नजदीकी संपर्क में थे और उन्होंने कभी विलय का जिक्र नहीं किया.
उन्होंने यह भी बताया कि महायुति सरकार में अजित पवार की कुर्सी को कोई खतरा नहीं था, इसलिए उनका पार्टी छोड़ने या विलय की ओर बढ़ने की संभावना कम थी. एनसीपी (अजित पवार) के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबल का भी कहना है कि 2023 में एनडीए में शामिल होने का निर्णय अंतिम था और शरद पवार के एनसीपी के साथ विलय पर कोई चर्चा नहीं हुई थी. तटकरे ने कहा कि एनसीपी (अजित पवार) अब एनडीए का हिस्सा है और यह शरद पवार पर निर्भर है कि वो अपनी पार्टी को सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल करना चाहते हैं या नहीं.
विलय की बातचीत बंद दरवाजे में हुई: शरद पवार
हालांकि, शरद पवार ने बिना किसी का नाम लिए इन इनकारों का जवाब दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि विलय की बातचीत 'बंद दरवाजे' के भीतर हुई, जिसमें केवल अजित पवार, जयंत पाटिल, सुप्रिया सुले और रोहित पवार शामिल थे. उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस और सुनील तटकरे जैसे लोग इस निजी समूह के बाहर थे और इसलिए इस मामले पर बोलने के लिए उनके पास जानकारी नहीं थी. इस संघर्ष के बीच, अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में नेतृत्व का संकट उत्पन्न हो गया है. प्रफुल पटेल और अन्य पार्टी कार्यकर्ता सुनेत्रा पवार को उनके दिवंगत पति के राजनीतिक विरासत का उत्तराधिकारी बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
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