
Maharashtra Political Crisis: महाराष्ट्र जैसी तस्वीर पहले इन 5 राज्यों में भी दिखी, जानें कब-कब क्या हुआ
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महाराष्ट्र की राजनीतिक उथल-पुथल जैसी स्थिति पहले भी कई राज्यों में सामने आ चुकी हैं. कई मामलों में राजनीतिक पार्टियों ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
महाराष्ट्र में राजनीति की वर्तमान तस्वीर पहले भी कई राज्यों में दिख चुकी है. अधिकतर राज्यों में कमजोर पड़ने वाली पार्टियों ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में जोर दिया है कि फ्लोर टेस्ट ही एकमात्र तरीका है, यह जानने का कि सत्ता में कौन रहेगा. हालांकि इस तरह के मामलों में राज्यपाल की शक्तियों के कुछ बड़े कानूनी और राजनीतिक मुद्दे, बागी विधायकों की सजा और दल-बदल विरोधी कानून का दायरा क्या होगा, जैसे सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं जो सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.
जानें महाराष्ट्र जैसी स्थिति किन-किन राज्यों में कब-कब सामने आई... उत्तर प्रदेश
1998 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल ने यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को उनके पद से हटा दिया था और कांग्रेस नेता जगदंबिका पाल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि यह निर्धारित करने के लिए कि कौन सत्ता पर काबिज होगा, तत्काल फ्लोर टेस्ट कराया जाना चाहिए.
यह मुद्दा तब और बढ़ गया जब 12 विधायकों ने अपनी पार्टी के समर्थन के फैसले के खिलाफ सत्तारूढ़ भाजपा से समर्थन वापस ले लिया. दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनके खिलाफ कार्यवाही का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट में था, लेकिन अदालत ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने फ्लोर टेस्ट आयोजित करने से एक दिन पहले फ्लोर टेस्ट आयोजित करने के आदेश के बाद भी विधायकों की अयोग्यता को बरकरार रखा था.
झारखंड
सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में झारखंड में तत्काल फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था. उस वक्त सुप्रीम कोर्ट में भाजपा की ओर से एक याचिका दायर की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन राज्यपाल ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री के रूप में बैठा दिया था, भले ही भाजपा ने बहुमत का दावा किया था. राज्यपाल ने एक जूनियर विधायक को प्रोटेम स्पीकर के रूप में भी नियुक्त किया था, जिसका याचिकाकर्ताओं ने भी विरोध किया था. बीजेपी के अर्जुन मुंडा और अजय कुमार झा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अदालत ने कहा था कि झारखंड विधानसभा का सत्र 10 मार्च को बुलाया गया था, जहां विधायकों के शपथ लेने की उम्मीद थी. कोर्ट ने निर्देश दिया कि 11 मार्च को फ्लोर टेस्ट कराया जाए. अरुणाचल प्रदेश

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