
Mahakumbh 2025: एक टिकट की कीमत ₹50000... अचानक क्यों इतनी महंगी हुई प्रयागराज के लिए फ्लाइट?
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हवाई किराये की यह चर्चा इसलिए तेज हो रही है, क्योंकि कल महाकुंभ का शाही स्नान है और प्रयागराज के संगम में डूबकी लगाने के लिए बड़ी संख्या में लोग शामिल होने वाले हैं. इस मौके पर एयलाइंस कंपनियों ने भी हवाई किराया काफी महंगा कर दिया है.
महाकुंभ प्रयागराज के लिए हवाई उड़ान का किराया आसमान छू रहा है. एयरलाइंस प्रयागराज जाने और वहां से आने के लिए नॉर्मल किराये से 4 से 5 गुना ज्यादा किराया वसूल रही हैं. यह सिर्फ महाकुंभ की बात नहीं है, भारत में अक्सर हर फेस्टिवल पर यह किराया बढ़ जाता है. ऐसे में अब यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर क्यों इतना महंगा किराया वसूला जाता है और एयरलाइंस द्वारा किराया बढ़ाने का फार्मूला क्या है?
दरअसल, हवाई किराये की यह चर्चा इसलिए तेज हो रही है, क्योंकि कल यानी 29 जनवरी को महाकुंभ में शाही स्नान और प्रयागराज के संगम में डूबकी लगाने के लिए बड़ी संख्या में लोग शामिल होने वाले हैं. इस मौके पर एयलाइंस कंपनियों ने भी हवाई किराया काफी महंगा कर दिया है.
उदाहरण के लिए, दिल्ली-प्रयागराज वापसी हवाई किराया (Delhi-Pryagraj Air Fare) चार गुना बढ़कर 50,000 रुपये से ज्यादा हो गया है. कई लोग इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं. मौनी अमावस्या के कारण 28 और 29 जनवरी को प्रयागराज में सबसे अधिक भीड़ होने की उम्मीद है. इंडिया टुडे के मुताबिक, 28 जनवरी के लिए मुंबई-प्रयागराज रिटर्न टिकट की कीमत सबसे सस्ती 41,000 रुपये से ज्यादा है.
DGCA ने जारी किया निर्देश एयरलाइंस कंपनियों पर नजर रखने वाले नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने अब हवाई किराये में इतनी बढ़ोतरी को लेकर हस्तक्षेप किया है. DGCA ने एयरलाइंस कंपनियों को प्रयागराज के लिए हवाई किराये को तर्कसंगत बनाने का निर्देश जारी किया है. इंडिया टुडे टीवी के गौरव सावंत ने बताया कि ज्यादा हवाई किराया के कारण उन्हें दिल्ली से प्रयागराज तक सड़क मार्ग से यात्रा करनी पड़ी.
भारत में हवाई किराया कैसे तय होता है? कुंभ ही नहीं होली और दिवाली जैसे ज्यादातर त्यौहारों के दौरान हम हवाई किराये में इसी तरह की बढ़ोतरी देखते हैं. गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों के मौसम में भी यही होता है. पूर्व कॉरपोरेट और निवेश बैंकर अमिताभ तिवारी ने इंडिया टुडे को बताया कि सरल सवाल यह है कि हवाई किराया किस तरह से तय होता है? उन्होंने कहा कि सरकार को एयरलाइंस से यह सवाल पूछने की आवश्यकता है कि प्राइस तय करने के लिए कौन सा फार्मूला अपनाया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि सर्विस की लागत में कोई उछाल नहीं हुई है. फिर भी एयरलाइंस कंपनियां ज्यादा चार्ज क्यों वसूल रही हैं? एयरलाइंस कंपनियां स्पष्ट रूप से मांग से मुनाफा कमा रही हैं.

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