
Kota suicides: हाई लेवल कमेटी ने कहा, कोचिंग में पढ़ाई के घंटे कम हों, फन एक्टिविटी जरूरी
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कोटा के जिला कलेक्टर ओपी बंकर ने मीडिया को बताया कि यह सिफारिश यहां कोचिंग छात्रों द्वारा आत्महत्या की जांच करने के लिए विशेषज्ञों, सामाजिक कल्याण संगठनों और आध्यात्मिक व योग समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बनी राज्य स्तरीय समिति की मैराथन बैठक के बाद आई.
कोटा में सुसाइड की बढ़ती घटनाओं के बाद बनी हाई लेवल कमेटी ने अपनी सिफारिशें पेश की हैं. अधिकारियों ने बताया कि एक उच्च-स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति ने सोमवार को यहां कोचिंग संस्थानों को स्टडी के घंटे कम करने और मनोरंजक गतिविधियों को अपनी दिनचर्या में शामिल करके छात्रों के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाने की सिफारिश की है.
कोटा के जिला कलेक्टर ओपी बंकर ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि यह सिफारिश यहां कोचिंग छात्रों द्वारा आत्महत्या की जांच करने के लिए विशेषज्ञों, सामाजिक कल्याण संगठनों और आध्यात्मिक व योग समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बनी राज्य स्तरीय समिति की मैराथन बैठक के बाद आई.
प्रमुख सचिव (उच्च और तकनीकी शिक्षा) भवानी सिंह देथा की अध्यक्षता में बनी समिति ने गठन के बाद अपनी पहली बैठक में पांच सत्रों में आयोजित मैराथन बैठक के दौरान हितधारकों से सुझाव मांगे थे. यह बैठक सुबह 10.30 बजे से शाम 7 बजे तक 8 घंटे से अधिक समय तक चली.
कोटा में कोचिंग कक्षाएं लेने वाले NEET और JEE उम्मीदवारों द्वारा आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के बीच अगस्त में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा इस अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया था. बंकर ने कहा कि हितधारकों से प्राप्त सिफारिशों के आधार पर राज्य स्तरीय समिति एक रिपोर्ट तैयार करेगी और राज्य सरकार को सौंपेगी. कोचिंग संस्थानों द्वारा ली जाने वाली फीस में कमी के संबंध में कलेक्टर ने कहा कि सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती क्योंकि यह सीधे छात्रों और संस्थानों के बीच है.
स्क्रीनिंग के बाद हो रही काउंसिलिंग इस बीच, एक राज्य स्तरीय टीम शहर भर के सभी कोचिंग संस्थानों में हेल्थ स्क्रीनिंग सर्वे कर रही है. बंकर ने कहा कि लगभग 80 प्रतिशत छात्रों ने उनके द्वारा प्रदान किया गया हेल्थ फॉर्म भर दिया है, जिसके आधार पर संदिग्ध प्रवृत्ति वाले छात्रों की पहचान की जा रही है और उन्हें काउंसिलिंग के लिए भेजा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि संदिग्ध लक्षणों या संकेतों के गंभीर मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और ऐसे छात्रों के माता-पिता को अपने बच्चों की सहायता के लिए कोटा आने के लिए कहा जा रहा है. वहीं, गंभीर मामलों में जहां छात्र दूसरे दौर की काउंसलिंग में अनफिट पाए जाएंगे, उन्हें उनके माता-पिता के साथ घर भेज दिया जाएगा.

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