
Kashi Vishwanath Temple Owl: काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर पर दिखा सफेद उल्लू, जानें कितना शुभ है ये संकेत
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Kashi Vishwanath Temple: सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर में काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर पर एक सफेद उल्लू बैठा दे रहा है. ऐसी जानकारी है कि यह उल्लू करीब तीन दिन से मंदिर के शीर्ष पर बैठा हुआ है. सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं.
Kashi Vishwanath Temple White Owl: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भगवान शिव को समर्पित काशी विश्वनाथ मंदिर से एक बड़ी ही दुर्लभ और दिलचस्प तस्वीर सामने आई है. दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर में काशी विश्वनाथ मंदिर के शिखर पर एक सफेद उल्लू बैठा दिख रहा है. श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कारीकारी अधिकार (सीईओ) विश्व भूषण मिश्र ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर यह तस्वीर अपलोड की है.
अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में विश्व भूषण मिश्र ने लिखा, '17 अगस्त को शयन आरती, 18 अगस्त को सायंकालीन श्रृंगार आरती के बाद आज सफेद उल्लू महाराज ने सप्तऋषि आरती में प्रतिभाग कर शिखर कोड़र में अपना निर्धारित स्थान ग्रहण कर उत्सुकता बढ़ाई है.' विश्व भूषण मिश्र के इस पोस्ट से पता चलता है कि मंदिर के शिखर पर यह उल्लू तकरीबन तीन दिन से दिखाई दे रहा था.
ऐसे में मंदिर परिसर में मौजूद भक्त इस घटना को एक बड़ा शुभ संकेत मान रहे हैं. चूंकि शास्त्रों में उल्लू को मां लक्ष्मी का वाहन बताया गया है, इसलिए इसका दिखाई देना सुख-समृद्धि और धनधान्य का संकेत हो सकता है. इस विषय पर हमने ज्योतिषाचार्य डॉ. अरुणेश कुमार शर्मा से बात की और उन्होंने बताया कि कैसे इस सफेद उल्लू को एक शुभ संकेत समझा जाए.
1. अचानक लाभ- मां लक्ष्मी के वाहन उल्लू का नजर आना आर्थिक मोर्चे पर लाभ का संकेत समझा जाता है. कहते हैं कि सफेद उल्लू अचानक धन की प्राप्ति मसलन पैतृक संपत्ति का लाभ या कहीं से फंसे हुए धन की वापसी जैसे संकेत देता है.
2. रोजगार में लाभ- ज्योतिषाचार्य ने बताया कि रात के समय सफेद उल्लू दिखना नौकरी-व्यापार में उन्नति का शुभ संकेत देता है. इसलिए इसे कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
3. अनहोनी का टलना- ऐसा भी कहते हैं कि सफेद उल्लू दिखने का मतलब होता है कि आपके ऊपर आने वाली कोई बड़ी मुसीबत टल गई है. और संकट की स्थिति में भगवान का आशीर्वाद आप पर बना हुआ है.

Chalisa Yog: ज्योतिष शास्त्र में चालीसा योग उस स्थिति को कहा जाता है जब दो ग्रह आपस में 40 अंश (डिग्री) की दूरी पर स्थित होते हैं. इस योग का नाम ही “चालीसा” है, क्योंकि इसका संबंध 40 अंश के अंतर से होता है. चालीसा योग का प्रभाव हर राशि पर समान नहीं होता. यह ग्रहों की स्थिति, भाव और व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है कि यह योग शुभ फल देगा या सावधानी की जरूरत पैदा करेगा.

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