
Karwa Chauth 2024: करवा चौथ की एक नहीं, चार-चार लोक कथाएं, पूजा के दौरान जरूर पढ़ें
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Karwa Chauth 2024: करवा चौथ से जुड़ी एक नहीं बल्कि चार लोक कथाएं प्रचलित हैं, जिनसे पता चलता है कि इस व्रत की परंपरा कितनी पुरानी है. पहली कथा पौराणिक है और महाभारत काल से जुड़ी है.
Karwa Chauth 2024: आज देशभर में सुहागनों ने पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखा है. यह व्रत कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को रखा जाता है. करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति का एक अहम हिस्सा है और पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है. अक्सर लोगों के मन में ये सवाल आता है कि करवा चौथ का व्रत कब से आरंभ हुआ. इसका इतिहास क्या है.
दरअसल करवा चौथ से जुड़ी एक नहीं बल्कि चार लोक कथाएं प्रचलित हैं, जिनसे पता चलता है कि इस व्रत की परंपरा कितनी पुरानी है. पहली कथा पौराणिक है और महाभारत काल से जुड़ी है.
महाभारत में करवा चौथ की कहानी करवा चौथ की यह कथा द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को सुनाई थी. ये कहकर कि इसी कथा को भगवान शिव ने माता पार्वती को सुनाया था, जिसमें एक ब्राह्मण की बेटी के सात भाई थे. बेटी मायके आती है और करवा चौथ का व्रत रखती है. लेकिन अपनी बहन को भूखा प्यासा देख भाई परेशान हो जाते हैं. और मिलकर बहन को बनावटी चांद दिखा देते हैं.
महिला कृत्रिम चंद्रमा को देखकर भोजन ग्रहण कर लेती है, जिसके बाद उसके पति की मृत्यु हो जाती है. महिला विलाप करती है. तभी वहां से रानी इंद्राणी गुजर रही होती हैं. वो कन्या से कहती हैं तूने बगैर चंद्र दर्शन किए व्रत तोड़ दिया. अब चौथ आने पर दोबारा व्रत रखना होगा. इससे तेरा पति पुन: जीवित हो जाएगा. महिला ने फिर व्रत रखा और वो सौभाग्यवती हो गई. श्रीकृष्ण से कथा सुनकर द्रौपदी ने भी अर्जुन की सलामती के लिए ये व्रत किया था.
करवा चौथ की दूसरी कथा करवा नाम की एक महिला अपने मायके में करवा चौथ का व्रत रखती है. भाई अपनी लाडली बहन को भूखा-प्यासा देख व्याकुल हो उठते हैं. छोटा भाई तो इतना व्यथित हो जाता है कि वो पीपल के पेड़ पर दीपक जलाकर छन्नी में रख देता है और बहन से कहता है कि चांद निकल गया है. दर्शन करके भोजन कर लो. चंद्र दर्शन के बाद जैसे ही वो भोजन का पहला कौर मुंह में डालती है तो उसे छींक आ जाती है. दूसरा कौर डालती है तो मुंह में बाल आ जाता है और तीसरा कौर डालने पर उसे पति की मृत्यु का समाचार मिलता है.
तब उसकी भाभी उसे बताती है कि व्रत टूटने के कारण ऐसा हुआ है. इसके बाद महिला पति का अंतिम संस्कार न करने का निश्चय लेती है. और संकल्प लेती है कि अपने सतीत्व से उसे पुनर्जीवित करेगी. एक साल बाद फिर से करवा चौथ आता है. उसकी सभी भाभियां व्रत रखती हैं. जब भाभियां उससे आशीर्वाद लेने आती हैं तो वो उनसे अपने जैसी सुहागन बना देने का आग्रह करती है. छोटी भाभी पसीजकर उसके मृत पति के मुंह में अपनी छोटी अंगुली से अमृत डाल देती है. आखिरकार करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है.

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