
Janmashtami 2021: दुर्योधन के 56 भोग छोड़ कृष्ण ने खाया था बथुए का साग, जानें क्यों खास है ये जगह
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बिजनौर में महात्मा विदुर की कुटिया में कृष्ण ने दुर्योधन के छप्पन भोग त्यागकर बथुए का साग खाया था. इसीलिए श्रीकृष्ण की आरती के बाद लगने वाले भोग में एक श्लोक बिजनौर में महात्मा विदुर की इस कुटिया से भी जुड़ा है. इसमें कहा गया है- 'दुर्योधन की मेवा त्यागी साग विदुर घर खायो जी'
बिजनौर से भगवान श्रीकृष्ण का पुराना नाता रहा है. ऐसी मान्यताएं हैं कि बिजनौर में महात्मा विदुर की कुटिया में कृष्ण ने दुर्योधन के छप्पन भोग त्यागकर बथुए का साग खाया था. इसीलिए श्रीकृष्ण की आरती के बाद लगने वाले भोग में एक श्लोक बिजनौर में महात्मा विदुर की इस कुटिया से भी जुड़ा है. इसमें कहा गया है- 'दुर्योधन की मेवा त्यागी साग विदुर घर खायो जी'. यह श्लोक उस समय कहा गया था जब महाभारत का युद्ध होने वाला था और महात्मा विदुर इस युद्ध के पक्ष में नहीं थे. महात्मा विदुर ने महाराज धृतराष्ट्र को समझाते हुए आधा राज्य पांडवों को देने की बात कही थी. तब धृतराष्ट्र ने उन्हें अपमानित करते हुए राज दरबार से निकाल दिया था. इसके बाद महात्मा विदुर ने हस्तिनापुर का त्याग कर दिया था. वह यहीं बिजनौर से 10 किलोमीटर दूर गंगा किनारे कस्बा गंज में आकर अपनी कुटिया बनाकर रहने लगे थे और यहीं पर तपस्या करते थे. बाद में जब श्रीकृष्ण पांडवों के दूत बनकर दुर्योधन को समझाने आए थे कि वह युद्ध को टाल दें. लेकिन दुर्योधन ने समझौते का प्रस्ताव ठुकरा दिया और इससे नाराज होकर कृष्ण ने दुर्योधन के 56 भोग का त्याग करते हुए हस्तिनापुर से विदुर कुटिया में आकर बथुए का साग खाया था. तभी से इस विदुर कुटिया के प्रांगण में 12 महीने बथुए का साग पैदा होता है. अब यह कुटिया एक विशाल मंदिर का रूप ले चुकी है.More Related News

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