
J-K: इस साल 21 टारगेट किलिंग, कभी कश्मीरी पंडित तो कभी प्रवासी मजदूर बने आतंकियों का निशाना
AajTak
जम्मू-कश्मीर में टारगेट किलिंग्स का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. मंगलवार को आतंकियों ने दो कश्मीरी पंडित भाइयों पर हमला कर दिया. इस हमले में एक की मौत हो गई. आतंकी लगातार कश्मीरी पंडितों, प्रवासी मजदूरों और सरकारी कर्मचारियों को टारगेट कर रहे हैं. इस साल आतंकियों ने 21 लोगों की हत्या कर दी है.
Target Killings in Kashmir: जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को एक बार फिर से टारगेट किया गया है. मंगलवार को शोपियां जिले के चोटीगाम गांव में आतंकियों दो कश्मीरी पंडित भाइयों पर हमला कर दिया. इस हमले में एक की मौत हो गई, जबकि दूसरा घायल है.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, मंगलवार को सुनील कुमार पंडित अपने भाई पीतांबर नाथ पंडित के साथ सेब के बाग जा रहे थे. तभी वहां आतंकी आए, उनसे नाम पूछा और गोलियां बरसा दीं. इस हमले में सुनील की मौत हो गई. आतंकियों ने उन पर AK-47 असॉल्ट राइफल से हमला किया था. न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस साल कश्मीर में टारगेट किलिंग में 21 लोगों की जान चली गई है.
कश्मीरी पंडित की हत्या के बाद सरकार भी एक्शन में आ गई है. प्रशासन ने हत्या में शामिल आतंकी के घर को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इतना ही नहीं, सुरक्षाबलों ने आतंकियों को पनाह देने के आरोप में पिता और भाई को गिरफ्तार भी कर लिया है.
न्यूज एजेंसी के मुताबिक, चोटीगाम में सिर्फ दो या तीन ही कश्मीरी पंडित परिवार रहते हैं. ये जगह शोपियां डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर से 10 किलोमीटर और श्रीनगर से 70 किलोमीटर दूर है. ये जगह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों का गढ़ है.
एक ने गोली चलाई, दूसरे ने वीडियो बनाया
पुलिस ने बताया कि दो आतंकी दिनदहाड़े बाग में आए. इनमें से एक ने AK-47 से भाइयों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. दूसरा आंतकी मोबाइल से वीडियो बना रहा था.

न्यूजरूम में बात होगी तेल-गैस युद्ध बने ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध की. बताएंगे कि कैसे भड़का तेल-गैस युद्ध. इजरायल के हमले का जवाब ईरान ने कैसे दिया. ये भी बात होगी कि क्या ट्रंप का ऑपरेशन एपिक फ्यूरी फेल हो गया? क्या ईरान को निहत्था करने के लिए शुरू हुई जंग अब तेल-गैस युद्ध के साथ तीसरा विश्व युद्ध की तरफ बढ़ चला है.

देश के 3 शहरों से ऐसी खबरें आईं जिसने दिल दहला दिया. आग लगने के कारण दिल्ली, चंडीगढ़ और इंदौर में भयानक हादसे हुए. भीषण आग की चपेट में पूरा का पूरा परिवार आ गया. दिल्ली में 9 लोगों की मौत हुई तो इंदौर में भी 8 लोगों को जान गंवानी पड़ी. चंडीगढ़ में लगी आग भयावह जरूर है, लेकिन गनीमत रही कि किसी तरह की जनहानि नहीं हुई.

अमेरिका-इजरायल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत अब भी जारी है. गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं. गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है. होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म होने से बिजनेस ठप होने लगे हैं. कई जगह ताले भी लटकने लगे हैं. त्योहारी सीजन में घरों में भी इसका असर दिख रहा है.

पश्चिम बंगाल की सत्ता की कुर्सी का रास्ता अल्पसंख्यकों मोहल्लों से होकर गुजरता है. और ममता बनर्जी ने इस बात को न सिर्फ समझा है, बल्कि पिछले 15 सालों में इसी से अपनी सत्ता के किले को चुनाव दर चुनाव मजबूत बनाया है. आज जब 2026 के विधानसभा चुनाव करीब हैं, तो ममता का मुस्लिम वोट बैंक पर कब्जा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत नजर आता है.









