
IDF के चंगुल में आते-आते बच जा रहा याह्या सिनेवार, गाजा में चल रहा चूहे-बिल्ली का खेल!
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इजरायली मीडिया में सिनेवार की तुलना कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन से की जाती है. ओसामा बिन लादेन आतंकवादी संगठन अल-कायदा का संस्थापक था. 9/11 हमले के लिए अमेरिका लादेन को जिम्मेदार था. 2 मई 2011 को लादेन को अमेरिकी नौसेना ने पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया था.
इजरायल और हमास में जारी जंग के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार दावा किया कि इजरायली सेना ने याह्या सिनेवार के घर को घेर लिया है. हालांकि, सिनेवार अभी तक इजरायल की गिरफ्त में नहीं आया है. इजरायली सेना का मानना है कि वह गाजा पट्टी में ही कहीं अंडरग्राउंड हो गया है. हालांकि, गाजा के खान यूनिस पर इजराइल का आक्रमण जारी है. खान यूनिस को हमास और उसके गुर्गों का गढ़ माना जाता है.
अक्टूबर में शुरू हुए इजरायल-हमास युद्ध की शुरुआत से ही इजरायली सेना याह्या सिनवार की खाक छान रही है. याह्या सिनवार को 'बुचर ऑफ खान युनिस' भी कहा जाता है. आइए जानते हैं कौन है याह्या सिनवार और इजरायली मीडिया इसकी तुलना कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन से क्यों कर रहा है?
इससे पहले इजरायली रक्षा बल के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल रिचर्ड हेचट ने सिनेवार की तुलना 'बुराई का चेहरा' से की थी. इसके अलावा हेचट ने सिनेवार को 'चलता फिरता मरा हुआ आदमी' (dead man walking) बताया था. भयावह 9/11 आतंकी हमले के लिए अमेरिका लादेन को जिम्मेदार मानता था.
कौन है याह्या सिनेवार?
याह्या सिनेवार गाजा में हमास की पॉलिटिकल विंग का प्रमुख है. सिनेवार का जन्म 1962 में गाजा पट्टी के दक्षिण में खान यूनिस में एक फिलिस्तीनी शरणार्थी शिविर में हुआ था.
सिनवार इजरायल की मदद करने के आरोपी फिलिस्तीनियों को भी फांसी देने से नहीं चूकता है. यही वजह है कि उसे 'खान यूनिस का कसाई' के नाम से भी जाना जाता है. 1988 में इजरायली सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उसे गिरफ्तार किया गया था. लेकिन 2011 में उसे रिहा कर दिया गया.

वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.












