
Holika Dahan 2026: होलिका की अग्नि से मिलेगा संकेत, कैसा रहेगा विक्रम संवत 2083
ABP News
Holika Dahan 2026: होलिका की अग्नि की दिशा से अगली होली (Holi) तक का समय देश-दुनिया और अर्थव्यवस्था के लिए कैसा रहेगा, इसके संकेत मिलते हैं. होलिका की अग्नि का दक्षिण दिशा में उठना अशुभ माना जाता है.
Holika Dahan 2026: होली का त्योहार देशभर में प्रसिद्ध है. होली से पूर्व रात को होलिका दहन किया जाता है. होलिका दहन का दिन भक्तों को प्रह्लाद और होलिका की याद दिलाता है. होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है. हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है. लेकिन होलिका दहन के समय भद्रा का साया नहीं होनी चाहिए. भद्रा के समय होलिका दहन करने से अनहोनी की आशंका रहती है. इस साल होलिका दहन 2 मार्च को होगा और होली 4 मार्च को मनाई जाएगी.
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि, रंगों का त्योहार होली इस बार 4 मार्च को मनेगा. इससे पहले 2 मार्च की रात को (भद्रा पुच्छ) होलिका जलाई जाएगी. इस बार भद्रा दोष रहेगा, इसलिए रात में होलिका दहन हो सकेगा. हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार होलिका दहन के लिए 12 मिनट का ही समय रहेगा. 2 मार्च को शाम 5:56 बजे भद्रा काल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 5:28 बजे तक रहेगा. इस वर्ष भद्रा भूलोक में और सिंह राशि में मानी जा रही है, इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ रहेगा.
होलिका दहन पर भद्रा का साया
ज्योतिष के अनुसार, फाल्गुनशुक्ल की प्रदोषव्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित में करना शास्त्रसम्मत बताया गया है. फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:56 बजे शुरू होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक समाप्त होगी. प्रदोषकाल में पूर्णिमा होने से दिनांक 02 मार्च 2026 (सोमवार) को ही होलिका दहन होगा. इस दिन भद्रा सायं 05:56 से अन्तरात्रि 05:28 तक भूमिलोक (नैऋत्यकोण अशुभ) की रहेगी, जो कि सर्वथा त्याज्य है. यथा:- भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी (रक्षाबंधन) फाल्गुनी ऐलिकादहन) तथा। श्रावणी नृपतिं हन्ति ग्रामं दहति फाल्गुनी ॥ - मुहूर्तचिन्तामणि













