
Harda Blast: पटाखा फैक्ट्री के मालिक समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, दिल्ली भागने की कर रहे थे कोशिश
AajTak
मध्य प्रदेश स्थित हरदा पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है. फैक्ट्री के राजेश अग्रवाल नाम के मालिक को अरेस्ट किया गया है. फैक्ट्री को वह अपने भाई सोमेश अग्रवाल के साथ मिलकर चलाता था. बताया रहा है कि राजेश अग्रवाल को राजगढ़ जिले के सारंगपुर से अरेस्ट किया गया है. वह कार में सवार होकर दिल्ली फरार होने की फिराक में था.
मध्य प्रदेश स्थित हरदा पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. गिरफ्तार किए गए लोगों में राजेश अग्रवाल, सोमेश अग्रवाल और रफीक खान शामिल है. बताया रहा है कि राजेश अग्रवाल को राजगढ़ जिले के सारंगपुर से अरेस्ट किया गया है. वह कार में सवार होकर दिल्ली फरार होने की फिराक में था.
हरदा में अवैध फटाखा फैक्ट्री का संचालक राजीव अग्रवाल, और उसके बेटे को वेन्यु कार से सारंगपुर में गिरफ्तार किया गया है. आरोपी हादसे के बाद फरार हो गए थे. राजेश अग्रवाल उज्जनै से दिल्ली के लिए निकले थे. साथ ही सोमेश अग्रवाल भी था, जो वाहन में सवार था और मध्य प्रदेश छोड़ दिल्ली भागने की कोशिश कर रहा था.
ये भी पढ़ें: रिहायशी इलाके में फैक्ट्री क्यों, मेनटेनेंस में लापरवाही कैसे... हरदा की पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाके से उठे ये 7 सवाल
गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को भेजा गया हरदा
सारंगपुर एसडीओपी अरविंद सिंह ने बताया की मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश और दिल्ली को जोड़ने वाले नेशनल हाइवे पर सारंगपुर पुलिस ने रात 9 बजे राजीव अग्रवाल, सोमेश अग्रवाल और रफीक को गिरफ्तार किया है. कागजी कार्रवाई के लिए भोपाल आईजी के निर्देश पर आरोपियों को हरदा भेजा गया है. हरदा हादसे में मध्य प्रदेश पुलिस ने आईपीसी की धारा 304, 308, 34 एवं धारा 3 विस्फोटक अधिनियम के तहत तीनों आरोपियों को गिरफतार किया गया है.
हरदा फैक्ट्री ब्लास्ट में 11 लोगों की मौत

जम्मू-कश्मीर से लेकर हिमाचल प्रदेश तक पहाड़ों पर भारी बर्फबारी हो रही है और दृश्य अत्यंत सुंदर हैं. इस बर्फबारी के कारण कई पर्यटक इन जगहों की ओर जा रहे हैं. रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन गई है क्योंकि कई मार्ग बंद हो गए हैं. श्रीनगर में सुबह से लगातार बर्फबारी हो रही है जिससे मौसम में बदलाव आया है और तापमान गिरा है. पुलवामा, कुलगाम, शोपियां, गुरेज सहित अन्य क्षेत्र भी इस मौसम से प्रभावित हैं.

अमेरिका का ट्रंप प्रशासन इस महीने ‘ट्रंपआरएक्स’ नाम की एक सरकारी वेबसाइट लॉन्च करने की तैयारी में है, जिसके जरिए मरीज दवा कंपनियों से सीधे रियायती दरों पर दवाएं खरीद सकेंगे. सरकार का दावा है कि इससे लोगों का दवा खर्च कम होगा. हालांकि इस योजना को लेकर डेमोक्रेट सांसदों ने गलत तरीके से दवाएं लिखे जाने, हितों के टकराव और इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.

आज सबसे पहले दस्तक देने जा रहे हैं, पंजाब में ध्वस्त होते लॉ एंड ऑर्डर पर, पंजाब में बढ़ते, गैंग्स्टर्स, गैंगवॉर और गन कल्चर पर. जी हां पंजाब में इस वक्त एक दर्जन से ज़्यादा गैंग्स सरेआम कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रहे हैं, कानून के रखवालों के दफ्तरों के सामने हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं, और तो और बिना डरे, पंजाब पुलिस, पंजाब सरकार को, पंजाब के नेताओं, मंत्रियों, उनके बच्चों, उनके रिश्तेदारों को धमकियां दे रहे हैं. देखें दस्तक.

देहरादून के विकासनगर इलाके में दुकानदार द्वारा दो कश्मीरी भाइयों पर हमला करने का मामला सामने आया है. खरीदारी को लेकर हुए विवाद के बाद दुकानदार ने मारपीट की, जिसमें 17 साल के नाबालिग के सिर में चोट आई. दोनों भाइयों की हालत स्थिर बताई जा रही है. पुलिस ने आरोपी दुकानदार संजय यादव को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है.

जिस मुद्दे पर नियम बनाकर UGC ने चुप्पी साध ली, राजनीतिक दल सन्नाटे में चले गए, नेताओं ने मौन धारण कर लिया.... रैली, भाषण, संबोधनों और मीडिया बाइट्स में सधे हुए और बंधे हुए शब्द बोले जाने लगे या मुंह पर उंगली रख ली गई. आखिरकार उन UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल पूछते हुए इन्हें भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट मानते हुए इन नियमों पर अस्थाई रोक लगा दी. आज हमारा सवाल ये है कि क्या इन नियमों में जो बात सुप्रीम कोर्ट को नजर आई... क्या वो जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को दिखाई नहीं दी?

जब UGC के नए नियमों के खिलाफ छात्र सड़कों पर विरोध कर रहे थे और ये कह रहे थे कि उन्हें ज़बरदस्ती अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, तब सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इन नियमों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है, जिससे छात्रों को राहत मिली है. यह कदम छात्रों के अधिकारों की रक्षा और न्यायसंगत प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि नियमों को लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय और हितों को ध्यान में रखना आवश्यक है.







