
Future mode of transport: पॉड टैक्सी, फ्लाइंग टैक्सी, मैग्लेव ट्रेन, हाइपरलूप... ये 7 तकनीक हैं शहरी ट्रांसपोर्टेशन का फ्यूचर
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दिल्ली-मुंबई-बेंगलुरु जैसे हमारे बड़े शहरों में रहने वाले लोग ट्रैफिक जाम की समस्या से रोज ही जूझते हैं. बढ़ते शहरीकरण के बीच सड़कों पर बढ़ती भीड़ की समस्या से निजात पाने के लिए नए तकनीकी संसाधन तेजी से अपनाना ही अब आगे का रास्ता है. दुनिया के तमाम बड़े शहरों में ट्रांसपोर्टेशन के मॉडर्न साधन अपनाए जा रहे हैं और ट्रांसपोर्ट के ये फ्यूचर साधन आने वाले सालों में हमारे शहरों के यातायात सिस्टम का भी हिस्सा होंगे. आइए जानते हैं कि दुनिया के मॉडर्न शहरों में हमारे शहरों से अलग किन तकनीकों का इस्तेमाल यातायात के लिए किया जा रहा है और ये कैसे बदल रहे हैं जिंदगी.
सड़कों पर बेतहाशा भीड़ के बीच रेंगती गाड़ियां, कई-कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम, रेड लाइट्स पर अटकी ट्रैफिक की रफ्तार, मेट्रो ट्रेनों की धक्का-मुक्की और इन सब परेशानियों से जूझता शहरी जीवन... कमोबेश ये नजारा दिल्ली-मुंबई समेत भारत या कहें तो एशिया के अधिकांश शहरों के आज के ट्रांसपोर्ट सिस्टम की हकीकत है. लेकिन दुनिया तेजी से बदल रही है और उतनी ही तेजी से दुनियाभर के मॉडर्न शहरों में ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं भी.
दिल्ली-मुंबई-चेन्नई-कोलकाता जैसे देश के बड़े शहरों के साथ-साथ लखनऊ-जयपुर जैसे दूसरे शहरों में मेट्रो ट्रेनों की सुविधाओं के बाद अब देश में रैपिड ट्रेनों की शुरुआत हो रही है. लेकिन बदलावों का ये सिलसिला यहीं रुकने वाला नहीं है बल्कि मॉडर्न ट्रांसपोर्टेशन के कई आधुनिक साधन तेजी से विकसित हो रहे हैं. आज नई तकनीक पर आधारित ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं हमारे शहरों की प्लानिंग में भी शामिल हो रही हैं और आने वाले कुछ महीनों या सालों में ये हमारे जीवन का भी हिस्सा हो सकती हैं. यूपी के नोएडा में देश की पहली पॉड टैक्सी सर्विस शुरू की जाएगी. इस प्रोजेक्ट के लिए लंदन और आबुधाबी मॉडल का अध्ययन किया गया है. इसके लिए ग्लोबल टेंडर जारी किए जाएंगे.
आज दुनिया की आबादी 8 अरब के पार है और 10-20 साल पहले बनी सड़कें या ट्रांसपोर्ट सिस्टम यातायात की जरूरतों को पूरी नहीं कर सकती हैं. भारत समेत दुनिया के हर देश में तेजी से शहरीकरण बढ़ रहा है. गांव-कस्बे शहरों में बदलते जा रहे हैं तो ग्रामीण इलाकों से तेजी से अच्छे जीवनयापन की तलाश में लोग शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं और इसी का नतीजा है कि दुनियाभर के शहरों में तेजी से आबादी का बोझ बढ़ता जा रहा है. अगले दो-तीन दशकों में दुनिया और खासकर शहरों की डेमोग्राफी तेजी से बदलने वाली है. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों की मानें तो साल 2050 तक दुनिया की 70 फीसदी आबादी शहरी इलाकों में रह रही होगी जो कि आज 54 फीसदी है.
आज दुनियाभर में टोक्यो, दिल्ली और शंघाई सहित 33 मेगासिटीज हैं जो कि तीन दशक बाद 21.3 करोड़ लोगों की कुल बढ़ी हुई आबादी के साथ 14 और शहर मेगासिटीज की सूची में शामिल होंगे. दिल्ली के बारे में अनुमान है कि तब ये दुनिया का सर्वाधिक आबादी वाला शहर होगा. सरकारी अनुमान के मुताबिक भारत के शहरों में साल 2050 तक 85 से 90 करोड़ की आबादी रह रही होगी. इतनी बड़ी आबादी के लिए न तो शहर फैलाया जा सकेगा और न ही सड़कों पर आने से किसी को रोका जा सकेगा. ऐसे में ट्रांसपोर्ट सिस्टम में नई तकनीक को अपनाकर ही शहरों की जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा. जाहिर है हमारे शहरों को तेजी से ट्रांसपोर्ट के आधुनिक साधनों को अपनाना होगा.
आज हम आपको बताएंगे कि दुनिया के तमाम आधुनिक शहर ट्रांसपोर्ट के कौन से फ्यूचर टेक्नोलॉजी को अपना रहे हैं और जो निकट भविष्य में हमारे शहरों की जिंदगी का भी हिस्सा बन सकती हैं. सड़कों पर, पटरियों पर और यहां तक कि आसमान में शुरू हो रहे ट्रांसपोर्ट के ये 7 फ्यूचर मोड हैं जो भारतीय शहरों में भी आने वाले सालों में दिख सकते हैं-

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आज का दंगल घरेलू सियासत में देश के वैश्विक अपमान पर है. क्योंकि दिल्ली में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट में आज ऐसी घटना हुई है जिसे लेकर बीजेपी हमलावर है. दिल्ली में चल रहे जिस एआई समिट में शामिल होने के लिए दुनिया भर से नेता-उद्योगपति-टेक्नोकरेट्स भारत आए हुए हैं. उसी मेले में जाकर युवा कांगरसे के 10 कार्यकर्तां ने यूएस डील के विरोध में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. ये कार्यकर्ता अपनी टीशर्ट उतारकर उसे बैनर की तरह लहराकर प्रदर्शन कर रहे थे.

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