
Flights Ticket: दिवाली से पहले खुशखबरी... इतना सस्ता हुआ फ्लाइट टिकट, जानिए कहां-कितना किराया
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घरेलू मार्गों पर औसत हवाई किराये में 20-25 प्रतिशत की गिरावट आई है. ये कीमतें 30 दिन के APD (एडवांस पेमेंट डेट) के आधार पर एकतरफा औसत किराये के लिए हैं. पिछले साल दिवाली 10-16 नवंबर तक मानी गई थी, जबकि इस वर्ष यह 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक है.
दिवाली से पहले हवाई यात्रा करने वाले लोगों के लिए बड़ी खुशबरी सामने आई है. हवाई जहाज से सफर करने वाले लोगों के लिए घरेलू मार्गों पर औसत किराये (Air Ticket) में पिछले साल की तुलना में 20 से 25 फीसदी की गिरावट आई है. यानी कि पिछले साल की तुलना में यात्री इस साल सस्ते में हवाई सफर कर रहे हैं.
ट्रैवल पोर्टल इक्सिगो द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चला है कि घरेलू मार्गों पर औसत हवाई किराये में 20-25 प्रतिशत की गिरावट आई है. ये कीमतें 30 दिन के APD (एडवांस पेमेंट डेट) के आधार पर एकतरफा औसत किराये के लिए हैं. पिछले साल दिवाली 10-16 नवंबर तक मानी गई थी, जबकि इस वर्ष यह 28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक है.
क्यों किराये में आई गिरावट? विश्लेषण में इस गिरावट का कारण क्षमता में बढ़ोतरी और तेल की कीमतों में हाल की गिरावट को बताया गया है, जिन्हें हवाई टिकट की कीमतों में गिरावट के कारणों में से एक माना जाता है. पीटीआई के मुताबिक, इक्सिगो ग्रुप के सीईओ आलोक बाजपेयी ने बताया कि पिछले साल दिवाली के आसपास हवाई किराये में सीमित क्षमता के कारण उछाल आया था. उन्होंने कहा कि क्षमता में कमी मुख्य तौर से गो फर्स्ट एयरलाइन के निलंबन के कारण हुआ था.
आलोक बाजपेयी ने कहा कि इस साल हमने कुछ राहत देखी है. क्योंकि पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा क्षमताएं जोड़ी गई हैं. इससे अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में खास रूट्स पर एवरेज एयर टिकट में 20 से 25 फीसदी की गिरावट आई है.
इस रूट पर हवाई किराये में सबसे ज्यादा गिरावट खास रूटों पर तो हवाई किराये में कमी आई ही है, लेकिन एक खास रूट पर सबसे ज्यादा किराये में कमी आई है. विश्लेषण के अनुसार, औसत हवाई किराये में सबसे अधिक 38 प्रतिशत की गिरावट बेंगलुरू-कोलकाता उड़ान के लिए आई है, जो पिछले साल के 10,195 रुपये से घटकर इस साल 6,319 रुपये रह गई है.
किस रूट पर अब कितना किराया?

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












