
Exclusive: 'रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ' पर नहीं हुई कोई स्टडी, DPCC के पास नहीं कोई डेटा, इंडिया टुडे की RTI में खुलासा
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दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए केजरीवाल सरकार रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ अभियान चला रही थी. इस अभियान को एलजी वीके सक्सेना ने इस बार रोक दिया था. इसको लेकर इंडिया टुडे ने एक आरटीआई लगाई थी, जिसमें अभियान के रिजल्ट की हकीकत सामने आई. पता चला है कि दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के पास इस अभियान को लेकर कोई डेटा नहीं है.
दिल्ली में अक्टूबर महीने के बाद बढ़ते प्रदूषण की वजह से आम आदमी पार्टी और उपराज्यपाल वीके सक्सेना के बीच विवाद बढ़ गया. दिल्ली में जब लोग जहरीली हवा में सांस लेते हैं तो आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल सरकार एलजी की प्रदूषण को लेकर नीतियों की आलोचना करते हैं. इंडिया टुडे ने विशेष रूप से एक आरटीआई का उपयोग किया है, जिसमें रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ अभियान की सच्चाई थी.
दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए केजरीवाल सरकार रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ अभियान चला रही थी. इस अभियान को एलजी वीके सक्सेना ने इस बार रोक दिया था. इसको लेकर इंडिया टुडे ने एक आरटीआई लगाई थी, जिसमें अभियान के रिजल्ट की हकीकत सामने आई. आरटीआई से पता चला कि दिल्ली सरकार की प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के पास इस अभियान को लेकर कोई डेटा नहीं है.
आरटीआई में बताया कि गया दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के पास रेड लाइट ऑन गाड़ी ऑफ अभियान से संबंधित कोई सूचना और स्टडी नहीं है. इसके अलावा इस अभियान के विज्ञापनों और अभियानों पर खर्च की गई राशि का आरटीआई में कोई जवाब नहीं दिया गया था.
आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने कहा कि मेरी आरटीआई पर जवाब चौंकाने वाला था. डीपीसीसी दिल्ली सरकार की नोडल एजेंसी है, जो इस अभियान को चला रही है. उसने इस पर कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया है. इस अभियान पर डीपीसीसी ने बीते साल 10 करोड़ रुपये खर्च किए, बिना किसी वैज्ञानिक आधार पर. यह पैसा डीजल पर 25 पैसे प्रति लीटर पर उपकर द्वारा इकट्ठा किया जाता है. यह पैसा बर्बाद हो रहा है.
दिल्ली सरकार की ओर से आया जवाब
इस आरटीआई से हुए खुलासे के बाद दिल्ली सरकार ने जवाब दिया है. आप विधायक दुर्गेश पाठक ने कहा कि ये बहुत सामान्य सी बात है कि अगर कार को रेड लाइट पर बंद कर दिया जाए तो प्रदूषण कम हो जाएगा. यह स्कूलों में भी पढ़ाया जाता है. हम नहीं जानते कि एलजी को ये क्यों नहीं मिल रहा है. सामान्य ज्ञान के मुद्दों पर डेटा की कोई जरूरत नहीं है.

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