
Earthquake: बार-बार क्यों कांप रही है दिल्ली-NCR की धरती? बड़े भूकंप की आहट तो नहीं!
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पिछले कुछ महीनों में एक के बाद एक लगातार भूकंप के झटके महसूस करने के कारण दिल्ली-एनसीआर के लोग इस वक्त डरे हुए हैं. उन्हें आशंका है कि कहीं जल्द ही एनसीआर के इलाके में कोई बड़ा भूकंप ना आ जाए.
दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में लगातार भूकंप के तेज महसूस किए जा रहे हैं. कई इलाकों में शुक्रवार देर रात भी भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.4 दर्ज की गई. देर रात आए भूकंप के इन झटकों से लोग घबरा गए और घरों-दफ्तरों से बाहर दौड़ पड़े. इसके बाद अब सवाल उठने लगा है कि आखिर दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके लगातार क्यों महसूस होते हैं? यहां रहने वाले लोगों के दिमाग में यह सवाल बार-बार उठता है कि कहीं यहां बार-बार आने वाले झटके किसी बड़े भूकंप की आहट तो नहीं हैं?
इसके लिए एक्सपर्ट भी चेतावनी जारी कर चुके हैं. जिनका कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है. हालांकि ये कब आए, इसकी पुष्टि अभी नहीं की गई है. दिल्ली-एनसीआर के नीचे 100 से ज्यादा लंबी और गहरी फॉल्ट्स हैं. इसमें से कुछ दिल्ली-हरिद्वार रिज, दिल्ली-सरगोधा रिज और ग्रेट बाउंड्री फॉल्ट पर हैं. इनके साथ ही कई सक्रिय फॉल्ट्स भी इनसे जुड़ी हुई हैं.
जवाहरलाल नेहरू सेंटर ऑफ एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च में प्रोफेसर सीपी राजेंद्रन के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है. लेकिन ये कब आएगा और कितना ताकतवर होगा, ये कह पाना मुश्किल है. सीपी राजेंद्रन ने 2018 में एक स्टडी की थी. इसके मुताबिक साल 1315 और 1440 के बीच भारत के भाटपुर से लेकर नेपाल के मोहाना खोला तक 600 किलोमीटर लंबा सिस्मिक गैप बन गया था. 600-700 सालों से ये गैप शांत है, लेकिन इस पर लगातार भूकंपीय दबाव बन रहा है. हो सकता है कि ये दबाव भूकंप के तौर पर सामने आए. अगर यहां से भूकंप आता है तो 8.5 तीव्रता तक हो सकता है. डराने वाली बात यही है कि दिल्ली में 8.5 तीव्रता का भूकंप आया तो क्या होगा, कितनी बड़ी तबाही आएगी इसका अनुमान लगाना बहुत मुश्किल नहीं है.
भूकंप क्यों और कैसे आता है?
वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए हमें पृथ्वी की संरचना को समझना होगा. पृथ्वी टैक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है. इसके नीचे तरल पदार्थ लावा है और इस पर टैक्टोनिक प्लेट्स तैरती रहती हैं. कई बार ये प्लेट्स आपस में टकरा जाती हैं. बार-बार टकराने से कई बार प्लेट्स के कोने मुड़ जाते हैं और ज्यादा दबाव पड़ने पर ये प्लेट्स टूटने लगती हैं. ऐसे में नीचे से निकली ऊर्जा बाहर की ओर निकलने का रास्ता खोजती है. जब इससे डिस्टर्बेंस बनता है तो इसके बाद भूकंप आता है.
क्या भूकंप की भविष्यवाणी की जा सकती है?

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