
CPEC 2.0 इंडिया के लिए बनेगा नया खतरा? चीन-पाकिस्तान ने इस प्रोजेक्ट में जोड़े 5 नए कॉरिडोर
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CPEC शुरू से ही भारत के लिए चिंता का विषय रहा है, क्योंकि इसका एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है. अब जब इसे ‘CPEC 2.0’ के तहत विस्तार दिया जा रहा है, तो यह न केवल पाकिस्तान-चीन की आर्थिक साझेदारी को मजबूत करेगा बल्कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन के लिए भी चुनौती बन सकता है.
दक्षिण एशिया की कूटनीति इस वक्त दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर रही है. एक ओर एससीओ समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने दोनों देशों के रिश्तों में पिघलती बर्फ की उम्मीदें जगाई थीं. वहीं दूसरी ओर, बीजिंग और इस्लामाबाद की नजदीकी ने भारत की रणनीतिक चिंताओं को और गहरा कर दिया है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और चीनी प्रीमियर ली च्यांग की ताजा मुलाकात में ‘CPEC 2.0’ का ब्लूप्रिंट पेश किया गया, जिसमें पांच नए कॉरिडोर जोड़े गए हैं. चीन और पाकिस्तान ने इसे 'ऑल-वेदर पार्टनरशिप' का विस्तार बताया, लेकिन यह कदम भारत की सुरक्षा और क्षेत्रीय समीकरणों पर सीधा असर डाल सकता है.
भारत लंबे समय से CPEC का विरोध करता रहा है क्योंकि इसका एक अहम हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है. अब जब इसे ‘CPEC 2.0’ के तहत विस्तार दिया जा रहा है, तो यह न केवल पाकिस्तान-चीन की आर्थिक साझेदारी को मजबूत करेगा बल्कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन के लिए भी चुनौती बन सकता है.
शरीफ की चीन को धन्यवाद ज्ञापन
चीनी प्रीमियर के साथ मीटिंग के दौरान शहबाज शरीफ ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीनी नेतृत्व का धन्यवाद करते हुए कहा कि चीन ने हमेशा पाकिस्तान की भौगोलिक अखंडता, संप्रभुता और सामाजिक-आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चीन की सफलता से सीखकर साझा भविष्य वाली मजबूत पाकिस्तान-चीन कम्युनिटी बनाना चाहता है. शरीफ ने ग्वादर पोर्ट को पूरी तरह ऑपरेशनल करने, ML-1 रेलवे प्रोजेक्ट को जल्द लागू करने और कराकोरम हाईवे के री-अलाइनमेंट की आवश्यकता पर जोर दिया.
नई साझेदारी और समझौते

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