
Covishield को लेकर Britain का भेदभावपूर्ण रवैया, India ने जताई नाराजगी
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रिकॉर्ड समय में कोविड-19 वैक्सीन विज्ञान की उपलब्धि तो है लेकिन वैक्सीनेशन को लेकर भेदभाव वाला रवैया, चालबाजी और स्वार्थ भी भरपूर देखने को मिल रहा है. अभी तक अमीर और साधनसम्पन्न देश वैक्सीन मोनोपोली ही कर रहे थे लेकिन अब ब्रिटेन का वैक्सीन नस्लवाद भी सामने आया है. ब्रिटेन के इस वैक्सीन नस्लवाद का शिकार होने वाले बड़े देशों में भारत भी है. ब्रिटेन 4 अक्टूबर से दुनिया के यात्रियों को आने की इजाजत दे रहा है, लेकिन भारत में वैक्सीन प्राप्त यात्रियों को वहां जाकर 10 दिन क्वारंटीन रहना होगा. ब्रिटेन के इस ट्रैवल रूल का सबसे बड़ा विरोधाभाष ये है कि भारत में निर्मित कोविशील्ड को वो मान्यता तो देता है, लेकिन भारत में जारी कोरोना वैक्सीन सर्टिफिकेट को उसने मंजूरी नहीं दी है. देखें वीडियो.

ग्रीनलैंड में आजादी की मांग दशकों से चल रही है. फिलहाल यह द्वीप देश डेनमार्क के अधीन अर्ध स्वायत्त तरीके से काम करता है. मतलब घरेलू मामलों को ग्रीनलैंडर्स देखते हैं, लेकिन फॉरेन पॉलिसी और रक्षा विभाग डेनमार्क सरकार के पास हैं. अब कयास लग रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद के बीच वहां अलगाववाद को और हवा मिलेगी.

स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दावोस भाषण ने उस धारणा को तोड़ दिया कि वेस्टर्न ऑर्डर निष्पक्ष और नियमों पर चलने वाली है. कार्नी ने साफ इशारा किया कि अमेरिका अब वैश्विक व्यवस्था को संभालने वाली नहीं, बल्कि उसे बिगाड़ने वाली ताकत बन चुका है. ट्रंप के टैरिफ, धमकियों और दबाव की राजनीति के बीच मझोले देशों को उन्होंने सीधा संदेश दिया है- खुद को बदलो, नहीं तो बर्बाद हो जाओगे.

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.








