
Commonwealth Games 2022 LIVE: लवप्रीत सिंह ने वेटलिफ्टिंग में जीता ब्रॉन्ज, उठाया रिकॉर्डतोड़ 355 KG. वजन
AajTak
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत की नज़रें अपना प्रदर्शन सुधारने पर हैं. बुधवार को मेडल मैच में वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह हिस्सा ले रहे हैं. 109 किग्रा. कैटेगरी में उनपर भारत को गोल्ड मेडल दिलाने की जिम्मेदारी है.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत को एक और ब्रॉन्ज मेडल मिला है. वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने बुधवार को 109 KG. कैटेगरी में कमाल किया और देश के नाम ब्रॉन्ज मेडल किया. अभी तक यह भारत का 14वां मेडल है, जबकि यह चौथा ब्रॉन्ज मेडल है. लवप्रीत सिंह ने इस गेम में कुल 355 (163+192) किग्रा. वजन उठाया, जो नेशनल रिकॉर्ड है. लवप्रीत सिंह ने खुद अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा है.
लवप्रीत सिंह ने ऐसे रचा इतिहास
लवप्रीत सिंह ने स्नैच राउंड में बेहतरीन खेल दिखाया और तीनों ही प्रयास में वह सफल साबित हुए. उन्होंने स्नैच राउंड में क्रमश: 157 Kg, 161 Kg और 163 Kg वजन उठाया. लवप्रीत ने इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में भी अपने तीनों प्रयास सफल किए और क्रमश: 185 Kg, 189 Kg, 192 Kg वजन उठाया. इस तरह लवप्रीत ने कुल 355 KG. (163 + 192) वजन उठाया है.
लवप्रीत सिंह ने जब क्लीन एंड जर्क का आखिरी राउंड पूरा किया, तबतक वह टॉप पर थे, लेकिन बाद में अन्य प्लेयर्स ने उन्हें पछाड़ दिया. एक वक्त पर टॉप पर चल रहे लवप्रीत गेम का अंत होने पर तीसरे नंबर पर आए और उनके नाम ब्रॉन्ज़ मेडल आया.स्नैच राउंड
पहला प्रयास- 157 KG. सफलदूसरा प्रयास- 161 KG. सफल तीसरा प्रयास- 163 KG. सफल
क्लीन एंड जर्क राउंड

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आमने सामने हैं. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीधे सीधे योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं तो प्रशासन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से पूछ रहा है कि बताएं वो शंकराचार्य कैसे हैं. लेकिन बात अब इससे भी आगे बढ़ गई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विरोधी उन्हें स्वयंभू शंकराचार्य बता रेह हैं.

227 सदस्यीय BMC में बहुमत के लिए 114 सीटों की जरूरत होती है. महायुति ने 118 वार्ड जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है. इसके बावजूद मेयर पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है. स्थिति तब और नाटकीय हो गई, जब शिंदे ने कथित खरीद-फरोख्त की आशंका के चलते नवनिर्वाचित 29 शिवसेना पार्षदों को सप्ताहांत में एक फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया.

नोएडा केवल उत्तर प्रदेश का शो विंडो नहीं है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय, प्रति व्यक्ति कंज्यूमर शॉपिंग, प्रति व्यक्ति इनकम टैक्स, प्रति व्यक्ति जीएसटी वसूली आदि में यह शहर देश के चुनिंदा टॉप शहरों में से एक है. पर एक शहरी की जिंदगी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है. बल्कि जब उसकी जान जा रही हो तो सड़क के किनारे मूकदर्शक बना देखता रहता है.

उत्तर प्रदेश की सरकार और ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहे विवाद में नई उर्जा आई है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने खुली चुनौती के साथ योगी आदित्यनाथ को उनके शंकराचार्य होने पर सवाल उठाए हैं. इस मुद्दे ने राजनीति में तेजी से हलचल मचा दी है जहां विपक्ष शंकराचार्य के समर्थन में खड़ा है जबकि भाजपा चुप्पी साधे हुए है. दूसरी ओर, शंकराचार्य के विरोधी भी सक्रिय हुए हैं और वे दावा कर रहे हैं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ही सच्चे स्वयंभू शंकराचार्य हैं.

उत्तर प्रदेश की सियासत में उल्टी गंगा बहने लगी है. मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर हुआ विवाद अब बड़ा मुद्दा बन गया है. जहां खुद अविमुक्तेश्वरानंद के तेवर सरकार पर तल्ख हैं, तो वहीं बीजेपी पर शंकराचार्य के अपमान को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज में संगम नोज तक पालकी पर जाकर स्नान करने से उन्हें रोका था.

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.







