
Chandra Grahan 2022 do's and don't: भारत में कुछ देर में चंद्र ग्रहण, भूलकर ना करें ये काम, घर में आती है कंगाली
AajTak
Chandra Grahan 2022 in India: 8 नवंबर 2022 को कार्तिक पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण होगा. यह चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा. 8 नवंबर 2022 को कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि भी है. ग्रहण काल के दौरान कुछ कार्यों को करना अशुभ माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि ग्रहण के दौरान इन कार्यों को करने से गरीबी और दरिद्रता का सामना करना पड़ता है.
Chandra Grahan 2022 Date: साल 2022 का अंतिम चंद्र ग्रहण कई मायनों में खास है. ये चंद्र ग्रहण एक पूर्ण चंद्र ग्रहण है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्र ग्रहण एक अशुभ घटना मानी जाती है. साल का यह अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देने वाला है.
भारत के कुछ ही हिस्सों में पूर्ण और अधिकतर हिस्सों में आंशिक चंद्रग्रहण दिखाई देगा. ऐसे में आज हम आपको कुछ ऐसे कामों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें चंद्र ग्रहण के दौरान करना काफी नुकसानदायक माना जाता है. इन कार्यों को चंद्र ग्रहण के दौरान करने से गरीबी और दरिद्रता और नकारात्मकता आती है.
चंद्र ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ ना करें- ग्रहण के दौरान देव पूजा को वर्जित माना जाता है. इस दौरान घर के मंदिर के दरवाजों को बिल्कुल भी ना खोलें और ना ही मूर्तियों को स्पर्श करें. ग्रहण के दौरान आरती और पूजा-पाठ करने की मनाही होती है.
इस दौरान सूनसान जगह पर अकेले न जाएं- चंद्र ग्रहण के दौरान किसी भी सूनसान जगह या श्मशान भूमि के पास नहीं जाना चाहिए. इस दौरान नकारात्मक शक्तियां काफी ज्यादा हावी रहती हैं. ग्रहण के दौरान इनकी शक्तियां बढ़ जाती हैं और आपको नुकसान पहुंचा सकती हैं. ऐसे में कोशिश करें कि ग्रहण के दौरान अपने घर में ही रहें.
नए काम की शुरुआत ना करें- चंद्र ग्रहण के दौरान व्यक्ति को किसी भी नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए. माना जाता है कि ग्रहण के दौरान नकारात्मक ऊर्जा अधिक रहती है. इसलिए इस दौरान किसी भी शुभ और मांगलिक कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए.
ग्रहण के दौरान इस कामों को करने से बचें- ग्रहण के दौरान व्यक्ति को सोने, नाखून और बाल काटने, सुई-धागा और नुकीली चीजों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. साथ ही ग्रहण के दौरान यात्रा करने से भी बचना चाहिए.

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












