
Buddha Purnima 2025: बुद्ध पूर्णिमा पर घर की इस जगह पर रखें लाफिंग बुद्धा, बनी रहेगी धन की आवक
AajTak
Buddha Purnima 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है. जिस तरह से बुद्ध पूर्णिमा पर गौतम बुद्ध की मूर्ति लाना बहुत ही शुभ माना जाता है. ठीक उसी तरह इस दिन लाफिंग बुद्धा की मूर्ति घर लाना बड़ा ही लाभकारी माना जाता है.
Buddha Purnima 2025: बुद्ध पूर्णिमा आज मनाई जा रही है. हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है. जिस तरह से बुद्ध पूर्णिमा पर गौतम बुद्ध की मूर्ति लाना बहुत ही शुभ माना जाता है. ठीक उसी तरह इस दिन लाफिंग बुद्धा की मूर्ति घर लाना बड़ा ही लाभकारी माना जाता है. लाफिंग बुद्धा को घर की खुशहाली, सुख, संपन्नता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
कहते हैं कि घर में लाफिंग बुद्धा की मूर्ति आने से धन-दौलत आता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, आप लाफिंग बुद्धा को घर या ऑफिस जैसी जगहों पर रख सकते हैं लेकिन इनके लिए सही दिशा का होना भी बेहद महत्वपूर्ण है. वहीं, कुछ ऐसी भी जगह हैं, जहां कभी भी लाफिंग बुद्धा को नहीं रखना चाहिए.
घर की इस दिशा में रखें लाफिंग बुद्धा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, लाफिंग बुद्धा को घर की पूर्वी दिशा में रखें. माना जाता है कि पूर्वी दिशा परिवार में खुशियां और सौभाग्य लाती है. इसके अलावा, फेंगशुई के मुताबिक, घर की इस दिशा में लाफिंग बुद्धा रखने से धन-दौलत में वृद्धि होने लगती है और यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी लाता है.
इसके अलावा, आप चाहें तो लाफिंग बुद्धा को घर, हॉल, कमरों या डाइनिंग हॉल के दक्षिण पूर्वी दिशा में भी रख सकते हैं. इससे भाग्य का साथ प्राप्त होगा और घर की आय में जबरदस्त बढ़ोतरी मिलेगी. वहीं, लाफिंग बुद्धा की मूर्ति बच्चों की स्टडी मेज पर रख सकते हैं. इससे उनकी एकाग्रता बढ़ेगी और शिक्षा में बेहतर परिणाम मिलेंगे. वास्तु शास्त्र के अनुसार, लाफिंग बुद्धा की प्रतिमा को मुख्य द्वार के सामने कम से कम 30 इंच की ऊंचाई पर रखना चाहिए. इसे रखने के लिए सही ऊंचाई 30 इंच से ऊपर और 32.5 इंच से कम होनी चाहिए.
घर के इस स्थान पर न रखें लाफिंग बुद्धा

आज पूरी दुनिया LNG पर निर्भर है. खासकर भारत जैसे देश, जहां घरेलू गैस प्रोडक्शन कम है, वहां LNG आयात बेहद जरूरी है. लेकिन जैसे ही युद्ध या हमला होता है, सप्लाई चेन टूट जाती है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं. कतर जैसे देशों से निकलकर हजारों किलोमीटर दूर पहुंचने तक यह गैस कई तकनीकी प्रोसेस और जोखिम भरे रास्तों से गुजरती है.












