
4 साल की 'नकली बच्ची', समझती है सारे इमोशंस और दिमाग है खूब तेज
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'लिटिल गर्ल' नाम की दुनिया की पहली एआई बच्ची को एजीआई (आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. ये 4 साल की बच्ची सारे इमोशंस समझती है.
चीनी वैज्ञानिकों के एक समूह ने दुनिया का पहला 'एआई बच्चा' बनाने का दावा किया है, जो तीन या चार साल के मानव बच्चे के समान व्यवहार और कैपेबिलिटी वाली एक यूनिट है.
टोंग टोंग या 'लिटिल गर्ल' नाम की दुनिया की पहली एआई बच्ची को एजीआई (आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. फ्रंटियर्स ऑफ जनरल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी एक्जीबीशन में इसका अनावरण किया गया, ये एआई मॉडल कुछ हद तक इमोश्नल बर्ताव भी कर सकता है जो अब तक एआई में नहीं देखा गया है. बीजिंग इंस्टीट्यूट फॉर जनरल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (बीआईजीएआई) में उनके रचनाकारों के अनुसार, टोंग टोंग लगातार मनुष्यों के साथ बातचीत और अन्वेषण के माध्यम से अपने स्किल और नॉलेज में सुधार करती है.
एग्जीबीशन के दौरान दिखाए गए एक प्रमोश्नल वीडियो में कहा गया है, "टोंग टोंग के पास एक दिमाग है और वह मनुष्यों द्वारा सिखाए गए सामान्य ज्ञान को समझने की कोशिश करती है. 'वह सही और गलत में अंतर समझती है. साथ ही विभिन्न स्थितियों में अपना नजरिया जाहिर करती है, और भविष्य को आकार देने की शक्ति रखती है."
पिछले महीने की बीजिंग प्रदर्शनी के दौरान, विजिटर्स लिटिल गर्ल के साथ बातचीत कर सकते थे और उसकी प्रोग्रामिंग के आधार पर उसके व्यवहार को चेक कर सकते थे. जैसे दूध गिर गया तो उसे साफ करने के लिए कपड़ा लाना या टेढ़ी लगी पेंटिंग को सीधा करने के लिए स्टूल पर चढ़ना आदि. ये बच्ची चेहरे के हावभाव और बातचीत के माध्यम से लोगों से बातचीत कर सकती है. वह खुशी, गुस्सा और उदासी जैसी विभिन्न भावनाओं को पहचानने में सक्षम है, साथ ही दूसरों की भावनात्मक स्थिति पर सही तरीके से रिएक्ट भी करती है. हालांकि वर्तमान में उसके पास तीन या चार साल के बच्चे की क्षमताएं और व्यवहार हैं लेकिन टोंग टोंग लगातार विकसित हो रही है और सुधार कर रही है. BIGAI के निदेशक झू सोंगचुन ने कहा, "सामान्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए, हमें ऐसी संस्थाएँ बनानी होंगी जो वास्तविक दुनिया को समझ सकें और उनके पास व्यापक स्किल हों.'

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