
4 बार के सांसद, MBA-पीएचडी, JPC-PAC में रोल... कौन हैं निशिकांत दुबे CJI पर जिनके बयान पर हो रहा विवाद?
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बिहार के भागलपुर में 28 जनवरी, 1969 को जन्मे 56 वर्षीय दुबे जनसंघ नेता के भतीजे हैं. वह मूल रूप से देवघर के रहने वाले हैं, जो अब झारखंड में पड़ता है. उनका राजनीतिक सफर देवघर से ही शुरू हुआ. वह बहुत कम उम्र में ही आरएसएस से जुड़ गए थे और इसकी शाखाओं में जाने लगे थे. भाजपा नेता को लोकसभा में एक मुखर वक्ता के रूप में जाना जाता है.
निशिकांत दुबे को बीजेपी प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उनकी मुखरता और विभिन्न मुद्दों पर अपनी पार्टी का बचाव करने के लिए जाना जाता है. हालांकि, इस बार झारखंड के गोड्डा से इस लोकसभा सांसद ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसे लेकर विपक्ष बीजेपी पर हमलावर है. यहां तक कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेनी नड्डा को आगे आकर कहना पड़ा कि निशिकांत दुबे का बयान निजी है और पार्टी का इससे कुछ लेना-देना नहीं है. जवाब में दुबे ने कहा कि वह पार्टी के अनुशासित सिपाही हैं और वह पार्टी जो कहेगी, वही करेंगे.
भाजपा नेता निशिकांत दुबे ने वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर शीर्ष अदालत को ही कानून बनाना है तो संसद और राज्य विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए. वह यहीं नहीं रुके, उन्होंने देश में हो रहे गृह युद्धों के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट इस देश को अराजकता की ओर ले जाना चाहता है.
निशिकांत दुबे ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, 'आप (सुप्रीम कोर्ट) नियुक्ति प्राधिकारी को कैसे निर्देश दे सकते हैं? राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति करते हैं. संसद इस देश का कानून बनाती है. आप उस संसद को निर्देश देंगे? आपने नया कानून कैसे बना दिया? किस कानून में लिखा है कि राष्ट्रपति को तीन महीने के भीतर फैसला लेना है? मस्जिदों के लिए आप कहते हैं कि उनसे संपत्ति के कागजात मांगना गलत है, लेकिन मंदिरों के लिए आप खुद ही कागज मांगते हैं. यह दोहरा मापदंड क्यों? अगर देश में कोई धार्मिक युद्ध भड़का रहा है, तो वह सुप्रीम कोर्ट है. आप इस देश को अराजकता की ओर ले जाना चाहते हैं.'
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कौन हैं निशिकांत दुबे?
बिहार के भागलपुर में 28 जनवरी, 1969 को जन्मे 56 वर्षीय दुबे जनसंघ नेता के भतीजे हैं. वह मूल रूप से देवघर के रहने वाले हैं, जो अब झारखंड में पड़ता है. उनका राजनीतिक सफर देवघर से ही शुरू हुआ. वह बहुत कम उम्र में ही आरएसएस से जुड़ गए थे और इसकी शाखाओं में जाने लगे थे. भाजपा नेता को लोकसभा में एक मुखर वक्ता के रूप में जाना जाता है. संसद जब चालू रहती है, तो दुबे की उपस्थिति करीब 100 फीसदी रहती है. सवाल पूछने, बहसों में हिस्सा लेने और प्राइवेट मेम्बर्स बिल लाने के मामले में उनकी गिनती देश के अग्रणी सांसदों में होती है. उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से छात्र राजनीति में कदम रखा. कॉर्पोरेट जगत में कुछ समय बिताने के बाद वह 2009 में सक्रिय राजनीति में उतरे और तबसे झारखंड के गोड्डा से लगातार 4 बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं.

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