
22000 शवों का पोस्टमार्टम... जिस महिला का मजाक उड़ा रहे लोग, उसका काम जान हो जाएगी बोलती बंद
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postmortem worker: इस महिला का काम शवों का पोस्टमार्टम करना है. उसे ये काम करते हुए 23 साल का वक्त हो गया है. ये काम कितना मुश्किल है, ये जानकर लोगों की बोलती बंद हो जाएगी. मगर वो इसी महिला का मजाक उड़ा रहे हैं.
सोशल मीडिया पर एक महिला का इंटरव्यू काफी वायरल है. उनका कहना है कि वो 22-23 हजार शवों का पोस्टमार्टम कर चुकी हैं. उनके वीडियो पर कुछ लोग मजाक भी बनाते दिख रहे हैं. लेकिन अगर उनके काम के बारे में जान लिया, तो इन्हीं लोगों की बोलती बंद हो जाएगी. वायरल वीडियो में दिख रही महिला से एक शख्स पूछता है कि आपने अभी तक कितने शवों का पोस्टमार्टम किया है? इसके जवाब में वो बोलती हैं, करीब 22 से 23 हजार का कर चुके हैं.
इसके बाद वो शख्स पूछता है कि शव को लेकर कहते हैं कि वो बैठ जाता है, जिंदा हो जाता है, तो क्या आपके साथ ऐसा कभी हुआ है? इस पर महिला बोलती हैं कि 'ऐसा तो नहीं हुआ. एक बार हुआ था जब शव आंख खोल रहा था. ताजा बॉडी थी. उसकी मौत को 7-8 घंटे हुए थे. उसके बाद उसे पोस्टमार्टम के लिए लाए. तो बार बार आंख खोल रहा था. हमने दो बार आंख मूंद दी. तीसरी बार में कहा कि शांत रहो, तुम डेड बॉडी हो.' बस इसी बात का लोगों ने मजाक उड़ाना शुरू कर दिया.
कौन है ये महिला?
अब इस महिला के बारे में जान लेते हैं. इनका नाम मंजू देवी है. ये बिहार के समस्तीपुर जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम सहायिका हैं. ये शव में चीरा लगाना, उसे सीलना और पैक करने का काम करती हैं. इस काम की शुरुआत उन्होंने साल 2000 से की थी. यानी वो 23 साल से ये काम कर रही हैं. उनके परिवार में चार पीढ़ियों से ये काम हो रहा है. मंजू देवी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनकी नौकरी कभी पर्मानेंट नहीं हुई. इसके लिए उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़ी है.
उन्हें दिन में अगर कोई एक शव आया, तो 380 रुपये मिल जाते हैं. अगर एक से ज्यादा शव आते हैं, तो भी 380 रुपये ही दिन के मिलते हैं. अगर किसी दिन शव नहीं आया, तो कुछ नहीं मिलता. वो जिस कमरे में काम करती हैं, वहां भी हालात ठीक नहीं हैं. कमरे में न तो एसी है और न ही पानी की व्यवस्था. ऐसी मुश्किल परिस्थितियों में भी वो शिकायत नहीं करतीं. मगर उनके इंटरव्यू का एक हिस्सा क्या वायरल हुआ, लोगों ने मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

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