
15 मील की दूरी और 35,000 फीट ऊंचाई, दो विमानों की भयंकर टक्कर कैसे टली?
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श्रीलंका का एक विमान बड़े हादसे का शिकार होते-होते रह गया है. 35,000 फीट की ऊंचाई पर एक दूसरे विमान से उसकी टक्कर हो सकती थी. लेकिन पायलटों की सूझबूझ ने हादसे को टाल दिया.
श्रीलंका की एक फ्लाइट 35 हजार फीट की ऊंचाई पर भयंकर हादसे से बच गई. उस फ्लाइट की ब्रिटिश एयरवेज के एक विमान से सीधी टक्कर होने वाली थी, सिर्फ 15 मील की दूरी बची थी. लेकिन पायलटों की सूझबूझ की वजह से उस हादसे को टाल दिया गया और दोनों ही विमानों की अपने गंतव्य स्थान पर सुरक्षित लैंडिंग हुई.
जानकारी मिली है कि श्रीलंकन एयरलाइन की फ्लाइट UL 504 जून 13 को लंदन से कोलंबो जाने के लिए उड़ान भरी थी. उस विमान में तब 275 यात्री मौजूद थे. अपने सफर के दौरान विमान तुर्की के एयरस्पेस में भी दाखिल हुआ था. तब श्रीलंका के विमान को 33 हजार से 35 हजार फीट की ऊंचाई पर आने का निर्देश दिया गया. लेकिन विमान में मौजूद पायलटों ने पाया कि उनसे सिर्फ 15 मील की दूरी पर एक ब्रिटिश एयरवेज का विमान भी उड़ रहा था. उस समय उसकी ऊंचाई 35 हजार फीट थी. जैसे ही पायलटों को इसकी जानकारी मिली उन्होंने अपने विमान को और ऊपर ले जाने से मना कर दिया.
श्रीलंकन विमान में मौजूद पायलटों ने इसकी जानकारी अंकारा ट्रैफिक कंट्रोलर को दी थी. लेकिन ट्रैफिक कंट्रोलर ने दो बार कहा कि रास्ता साफ है और उन्हें अपने विमान को 35 हजार फीट की ऊंचाई पर ले लेना चाहिए. बाद में खुद कंट्रोलर ने ही एक और आदेश में श्रीलंकन पायलटों को बताया कि वे 35 हजार फीट की ऊंचाई पर ना जाएं क्योंकि उन्होंने वहां एक दूसरे विमान को डिटेक्ट किया है. कहा जा रहा है कि अगर श्रीलंका का विमान एयर कंट्रोलर की बात मान ज्यादा ऊंचाई पर उड़ान भरता तो ब्रिटिश एयरवेज के विमान से उसकी टक्कर को कोई नहीं टाल सकता था. लेकिन क्योंकि पायलटों ने समय रहते फैसला लिया, मुस्तैदी दिखाई, एक भयंकर हादसा टाल दिया गया.
जारी बयान में श्रीलंका की एयरलाइन ने अपने पायलटों की दिल खोलकर तारीफ की है. जोर देकर कहा गया है कि उन्हीं की वजह से सभी 275 यात्री सुरक्षित अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच पाए हैं. एयरलाइन ने विमान में अत्याधुनिक संचार और निगरानी प्रणाली को भी क्रेडिट दिया है क्योंकि उसकी वजह से समय रहते दूसरे विमान की जानकारी मिल गई थी.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

ईरान लगातार इजरायल को निशाना बना रहा है. यरुशलम में ईरान के हमले की आशंका को लेकर सायरन बजे. आनन-फानन में लोग बम शेल्टर की ओर भागे. ये सायरन ईरान से मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी देते हैं. हमसे ले पहले कुछ मिनटों का ही समय होता है जिसमें इजरायली नागरिक अपने करीबी बम शेल्टर में तब तक शरण लेते हैं जब तक कि खतरा टल न जाए. देखें वीडियो.

ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

ईरान-इजरायल युद्ध आज अपने 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शांति की कोई गुंजाइश दिखने के बजाय यह संघर्ष अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है. ईरान द्वारा इजरायल के अराद और डिमोना शहरों पर किए गए भीषण मिसाइल हमलों से दुनिया हैरान है. ये शहर रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, इसलिए अब यह जंग सीधे तौर पर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है. युद्ध का सबसे घातक असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है.

तेल टैंकरों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता खोलने को लेकर ईरान को ट्रंप ने 48 घंटे की धमकी थी. समय सीमा खत्म होने से पहले ही नेटो एक्शन में आ गया है. नेटो महासचिव ने बताया कि होर्मुज में मुक्त आवाजाही सुवनिश्चित करने के लिए 22 देशों का समूह बन रहा है. साथ ही उन्होनें कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का कदम जरूरी था.







