
12वीं पास इस लड़के ने बिना लॉ किए सुप्रीम कोर्ट में जीता केस, जानें कैसे किया यह कारनामा?
ABP News
जबलपुर के एक आम से परिवार का बेटा, जिसने नीट पास करने के बाद भी सीट न मिलने पर हार नहीं मानी, जानें कैसे वह खुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अपने सपनो के लिए जंग लड़ी.
जबलपुर के एक साधारण से घर में रहने वाला एक लड़का, जिसकी दुनिया किताबों, क्रिकेट और सपनों के बीच घूमती थी. शाम को टीवी देखना, दोस्तों के साथ हंसना और डॉक्टर बनने के ख्वाब देखना, उसकी जिंदगी बिल्कुल आम थी. लेकिन जब मेहनत से लाए गए 530 अंक होने के बावजूद उसे मेडिकल सीट नहीं मिली, तो उसकी दुनिया जैसे ठहर गई हार मान लेना आसान था, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. उसने तय किया कि अगर रास्ता बंद है तो वह खुद नया रास्ता बनाएगा. यही फैसला उसे देश की सबसे बड़ी अदालत तक ले गया.जहां उसने झुककर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास से अपनी बात रखी. उसकी कहानी सिर्फ एक एडमिशन की नहीं, बल्कि उस हौसले की है जो मुश्किल हालात में भी टूटता नहीं.
नीट पास किया, फिर भी नहीं मिली सीट
अथर्व ने नीट परीक्षा दो बार पास की और 530 अंक हासिल किए. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS कोटे में उसका नंबर बन रहा था. परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, इसलिए यह कोटा उसके लिए उम्मीद की तरह था.लेकिन जब निजी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हुई तो पता चला कि राज्य में निजी कॉलेजों में EWS आरक्षण को लेकर साफ नियम ही नहीं बने थे. अंक होने के बावजूद उसे सीट नहीं मिल पा रही थी.सोचिए, एक छात्र जिसने दिन-रात मेहनत की हो, और जब मंजिल सामने दिखे तो दरवाजा बंद मिले यह दर्द वही समझ सकता है जिसने सपना देखा हो.
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर













