
100 साल पुरानी 2 फटी जींस 62 लाख में बिकीं, जमीन के अंदर थीं दफन!
AajTak
Oldest Jeans found: 1880 के दशक में खदान के अंदर से दो जींस मिली थीं. लेकिन हाल में यह जींस 62 लाख रुपए से ज्यादा की कीमत में बिकी हैं. इतने साल बीत जाने के बावजूद ये जींस पहनने की कंडीशन में हैं. एक जोड़ी जींस केल हॉपर्ट ने जिप स्टीवंसन के साथ मिलकर खरीदीं.
Oldest jeans found in mine: एक जोड़ी लिवाइस (Levi's) की जींस 62 लाख रुपए में बिकी है. खास बात यह है कि एक जोड़ी जींस अमेरिका में मौजूद निर्जन खदान से 1880 के दशक में मिली थीं. हालांकि, इन 2 जींस को खदान से निकले 100 साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है. इसके बावजूद यह आज भी पहनने लायक हैं.
वॉल स्ट्रीट जर्नल के अुनसार- एक जोड़ी जींस की बिक्री अमेरिका के न्यू मैक्सिको में हुईं. रिपोर्ट में कहा गया है कि Levi Strauss & Co ब्रांड की जींस 'गोल्ड रश' दौर की हैं. जींस की नीलामी के दौरान इस बात की जानकारी दी गई. इन जींस को लेकर ऐसा माना जा रहा है कि ये 1880 के दशक की हैं.
किसने खरीदी जींस वैसे ये एक जोड़ी जींस केल हॉपर्ट ने जिप स्टीवंसन के साथ मिलकर खरीदी. एक खरीदार के प्रीमियम को जोड़ने के बाद, दोनों ने जींस के लिए कुल 71लाख रुपए का भुगतान किया. केल हॉपर्ट विंटेज क्लोथिंग डीलर हैं. एक जोड़ी जींस को खरीदे जाने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा नजर आई. कई लोग इनकी इतनी ज्यादा कीमत पर हैरान नजर आए.
1853 में हुई थी Levi's की स्थापना अमेरिकी क्लोथिंग कंपनी Levi's की स्थापना 1853 में हुई, यह कंपनी दुनिया भर में डेनिम जींस के लिए फेमस है. कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जो जानकारी है, उसके अनुसार- बवेरियन (जर्मनी) में जन्मे लेवी स्ट्रॉस 'गोल्ड रश युग' में सैन फ्रांसिस्को आए थे, यहां आकर उन्होंने फैब्रिक बेचने का बिजनेस (ड्राय गुड्स बिजनेस) शुरू किया. वह कपड़े, जूते और अन्य सामान बेचते थे. उन्होंने ही सबसे पहले ब्लू जींस बनाई थी.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के दावोस शिखर सम्मेलन में मंगलवार को यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसके संकेत दिए. उन्होंने दावोस शिखर सम्मेलन में कहा कि कुछ लोग इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहते हैं, ऐसा समझौता जो 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा और वैश्विक GDP के करीब एक-चौथाई का प्रतिनिधित्व करेगा.

मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिकी फौजी जमावड़े ने स्थिति को काफी संवेदनशील बना दिया है. एयरक्राफ्ट कैरियर, फाइटर जेट्स और मिसाइल डिफेंस सिस्टम अलर्ट मोड पर हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य मदद भेजी है, जिसमें 56 घंटे के भीतर चीन के 16 जहाज ईरान पहुंचे. हालांकि इस सूचना की पुष्टि नहीं हुई है.

ईरान की राजधानी तेहरान में होने वाले विरोध प्रदर्शनों ने हालात को काफी गंभीर बना दिया है. जनता और सत्ता पक्ष के बीच भारी तनाव है जबकि अमेरिका भी लगातार दबाव बढ़ा रहा है. ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर तगड़ा हमला किया है. वहीं, अरब सागर की ओर अमेरिकी युद्धपोत की मौजूदगी से क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.

मिडिल ईस्ट में अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने ईरान को अब तक का सबसे बड़ा मिलिट्री एयरलिफ्ट भेजा है. 56 घंटों के भीतर चीन के 16 Y-20 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान ईरान पहुंचे. इसके अलावा HQ-9B एयर डिफेंस मिसाइल प्रणाली मिलने की भी चर्चा है जो लंबी दूरी तक दुश्मन के फाइटर जेट्स और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम मानी जाती है. ऐसे में क्या क्या खुलकर ईरान के समर्थन में उतर गया बीजिंग?

स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से पहले पाकिस्तान पर दबाव और विरोध का स्तर बढ़ गया है. पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सड़कों पर पाकिस्तान के खिलाफ नारे लगाए, जिनमें पाकिस्तानी सेना और प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगे. वे आरोप लगाते हैं कि सेना जबरन गायब करने, फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं और खनिज संसाधनों की लूट में शामिल है.








