
100 एयरक्राफ्ट, 120 टारगेट... हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर टूट पड़ा इजरायल, लेबनान में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक
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एक तरफ इजरायल में 7 अक्टूबर के हमले की बरसी पर शोक सभाएं चल रही थीं और दूसरी ओर उसकी सेना कई मोर्चों पर युद्ध लड़ रही थी. इजरायल ने लेबनान में अपने ग्राउंड ऑपरेशन का विस्तार किया और आईडीएफ की थर्ड डिवीजन भी युद्ध में शामिल हो गई.
इजरायल ने सोमवार को हिज्बुल्लाह के 130 रॉकेट हमलों का जवाब अपने 100 लड़ाकू विमानों के साथ लेबनान में करीब 120 साइटों को निशाना बनाकर दिया. ये विमान करीब 1 घंटे तक बम बरसाते रहे. आईडीएफ प्रवक्ता ने लेबनानी नागरिकों को अगली सूचना तक अवली नदी से दक्षिण की ओर समुद्र तट पर या नावों पर रहने से बचने की चेतावनी जारी की है. लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायली हमलों की यह लहर पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास द्वारा किए गए हमलों की बरसी पर आई, जो इस क्षेत्र में एक साल से जारी युद्ध की शुरुआत का कारण बना था.
आईडीएफ ने सोमवार को यह भी घोषणा की कि उसने उत्तरी इजरायल में एक नया क्लोज्ड मिलिट्री जोन घोषित किया है. लेबनान में इजरायली ग्राउंड ऑपरेशन शुरू होने के बाद से यह चौथा क्लोज्ड मिलिट्री जोन है, जो मेडिटेरेनियन सी से पूर्व की ओर फैला है. ताजा हवाई हमलों के बारे में जानकारी देते हुए आईडीएफ ने एक बयान में कहा, 'हमारे विमानों ने हिज्बुल्लाह की विभिन्न यूनिट्स को टारगेट करके हमले किए, जिनमें सदर्न फ्रंट की रीजनल यूनिट्स, रादवान फोर्सेज, मिसाइल और रॉकेट फोर्स और इंटेलिजेंस यूनिट शामिल थे.'
हिज्बुल्लाह के कई ठिकानों पर इजरायल ने बरसाए बम
आईडीएफ के मुताबिक यह हवाई हमला हिज्बुल्लाह के कमांड एंड कंट्रोल और फायरिंग क्षमताओं को नष्ट्र करने के लिए था. साथ ही इजरायली ग्राउंड ऑपरेशन में शामिल सैनिकों को उनके लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता करने के उद्देश्य से ये हवाई हमले किए गए. एक तरफ इजरायल में 7 अक्टूबर के हमले की बरसी पर शोक सभाएं चल रही थीं और दूसरी ओर उसकी सेना कई मोर्चों पर युद्ध लड़ रही थी. इजरायल ने लेबनान में अपने ग्राउंड ऑपरेशन का विस्तार किया और आईडीएफ की थर्ड डिवीजन भी युद्ध में शामिल हो गई.
हमास ने इजरायल में 7 अक्टूबर के हमलों के शोक में आयोजित मेमोरियल इवेंट्स को टारगेट करते हुए रॉकेट दागे और इजरायल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की कसम खाई. हालांकि, रॉकेट दागने की हमास की क्षमता गाजा में 12 महीने के विनाशकारी इजरायली हमले के कारण काफी हद तक कम हुई है. बता दें कि गाजा युद्ध में 42,000 के करीब लोगों की मौत हो चुकी है. इजरायल समय-समय पर यह कहता रहा है कि उसने गाजा में हमास को प्रभावी ढंग से हराया है.
लेबनान से इजरायल में दागे गए 130 से अधिक रॉकेट

वेस्ट एशिया में छिड़े युद्ध में आज अमेरिका की तरफ से ऐसे संकेत आए हैं कि जैसे अमेरिका ईरान के सामने थोड़ा झुका हो. अमेरिका ने ईरान के एनर्जी और पावर प्लांट पर हमलों को फिलहाल टाल दिया है. लेकिन सवाल है कि क्यों? अमेरिका और इजरायल का गठबंधन युद्ध के 24 दिनों के बाद भी ईरान को पूरी तरह से झुका नहीं पाया है. शुरुआत में भले ही अमेरिका इजरायल को कामयाबी मिली हो. लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि जैसे ईरान ने अपने ताकतवर बम युद्ध के इस हिस्से के लिए बचाकर रखे हों. इजरायल के न्यूक्लियर प्लांट तक ईरान के बम गिर रहे हैं. इजरायल का वर्ल्ड क्लास एयर डिफेंस सिस्टम फेल क्यों हो गया.

युद्ध के 24वें दिन आज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला बड़ा ऐलान किया. ट्रंप ने कहा कि बीते 2 दिनों से हो रही बातचीत के बाद मैंने ईरानी पावर प्लांट्स पर 5 दिनों के लिए हमले करना रोक दिया है. गौरतलब है कि भारतीय समय से आज रात ही ईरानी पावर प्लांट्स पर हमला करने की ट्रंप की डेडलाइन पूरी हो रही थी. सवाल ये है कि क्या ट्रंप ने अचानक यू टर्न लिया है? अगर ईरान के साथ बीते 2 दिनों से बातचीत हो रही थी तो लगभग 2 दिनों पहले उन्होंने अल्टीमेटम क्यों दिया था? क्यों उन्होंने शक्ति से शांति की बात की थी? सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान के तेवरों के आगे ट्रंप एग्जिट रूट ढूंढ रहे हैं? ट्रंप के ऐलान से क्या युद्ध रुक जाएगा? क्या ईरान और इजरायल युद्ध रोकेंगे? ईरान की मीडिया के अनुसार अमेरिका से ईरान का कोई संपर्क नहीं है.

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया, जिसका कारण दोनों देशों के बीच जारी सकारात्मक बातचीत बताया गया. डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान से पांच दिनों के भीतर डील हो सकती है. हालांकि, ईरान इन दावों को खारिज कर रहा है. इससे पहले अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने को लेकर चेतावनी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी.

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ईरान ने दावा किया है कि उसकी नेवी के एयर डिफेंस ने दो अमेरिकी ड्रोन मार गिराए. ईरान की स्टेट मीडिया के मुताबिक ये दोनों सुसाइड ड्रोन कथित तौर पर अमेरिकी सेना के थे. ईरान की सेना के मुताबिक ड्रोन का पता लगाया गया, उसे ट्रैक किया गया और इससे पहले कि वो बंदर अब्बास नौसैनिक बेस को निशाना बनाते, उन्हें मार गिराया गया. देखें वीडियो.

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